जबलपुर में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के समापन अवसर पर कहा कि भारत की आध्यात्मिकता मानव के अंदर निहित दिव्यता से परिभाषित होती है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति का मूल आधार भेदभाव या दीवारें नहीं, बल्कि आत्मा और मानवता है। दुनिया की भाषाओं और परंपराओं का आदर-सम्मान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा है।
राज्यपाल ने भगवान राम को भारत की एकात्मकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा का निवास है और हमें हर व्यक्ति में परमात्मा नजर आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि विचार तब तक प्रभावशाली नहीं होते जब तक वे आचार में नहीं बदलते।
आरिफ मोहम्मद खान ने भारत के धर्म और संस्कृति को मानवता और आध्यात्म से जोड़ा। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति शांति और अमन चाहता है, और आस्था की परंपराओं में अभिवादन के रूप में शांति का संदेश शामिल है। इतिहास दर्शाता है कि मानव का जीवन सस्ता समझा गया और रंग, भाषा और आस्था के आधार पर भेदभाव प्रचलित रहा।
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उन्होंने मानवाधिकार पर भी चर्चा करते हुए कहा कि यूनाइटेड नेशन्स ने 1948 में मानवाधिकारों की उद्घोषणा की, और हमारे संविधान में भी मानव अधिकारों के मुख्य सिद्धांत शामिल हैं। मानव होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति मानव प्रतिष्ठा का अधिकारी है। इससे पहले दुनिया इस सिद्धांत को स्वीकार नहीं करती थी और खुद को श्रेष्ठ मानकर कई देशों ने अन्य पर प्रभुत्व कायम किया।
राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार की सोच और संघर्ष ने ही दुनिया में युद्धों और संघर्षों को जन्म दिया, और यही कारण है कि आज हमें मानवता और आध्यात्म के संदेश को और मजबूत करने की आवश्यकता है।