मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर सियासत गरमाती जा रही है। विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। ताजा मामला कटनी जिले की मुड़वारा विधानसभा से सामने आया है, जहां कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा शक्ति प्रदर्शन किए जाने का आरोप लगा है।
दरअसल, इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल के निवास का घेराव कर सरकार से जवाब मांगने पहुंचे थे। कांग्रेस का कहना था कि वे प्रदेश सरकार और जिम्मेदार मंत्रियों से पीड़ितों को न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। लेकिन प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह बदल गया।
कांग्रेस नेताओं के आरोप हैं कि उनके पहुंचते ही विधायक निवास के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं ने डीजे पर तेज आवाज में धार्मिक भजन बजाने शुरू कर दिए और “जय श्रीराम” के नारे लगाते हुए नृत्य किया गया। कांग्रेस का दावा है कि पुलिस बल की मौजूदगी में उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया गया। एक ओर इंदौर में हुई मौतों को लेकर नारेबाजी हो रही थी, तो दूसरी ओर विधायक निवास के बाहर भजनों पर नाचते भाजपा कार्यकर्ता नजर आए, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस महिला जिलाध्यक्ष रजनी वर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इंदौर में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन सत्ता पक्ष सवालों से बचने के लिए या तो अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहा है या फिर डीजे की आवाज में जनता की आवाज दबा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।
वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमित शुक्ला ने आरोप लगाया कि अब जनता को अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने का अधिकार भी नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने विधायक निवास के बाहर बैरिकेडिंग कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को धक्का देकर पीछे रखा, ताकि उनकी बात विधायक तक न पहुंच सके। उनका आरोप है कि यह सब भाजपा शासन में संभव हो पा रहा है।
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इधर, मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुड़वारा विधायक संदीप जायसवाल ने कांग्रेस के सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना गंभीर है और सरकार ने इस पर संवेदना और खेद व्यक्त किया है, लेकिन किसी विधायक के निजी निवास का घेराव करना अनुचित है। विधायक ने कांग्रेस पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी कारण भगवान की प्रतिमा रखकर भजन चलाए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी प्रकार का जश्न या नृत्य नहीं किया गया।
फिलहाल, इंदौर की घटना को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश का माहौल है और कटनी में सामने आया यह दृश्य राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है। सवाल यह उठ रहा है कि मौत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और जवाबदेही के बजाय प्रदर्शन और शोर-शराबे की राजनीति लोकतंत्र को किस दिशा में ले जा रही है।