मध्यप्रदेश के कटनी जिला प्रशासन ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों का पालन करते हुए एक प्राकृतिक नाले पर बनी 200 मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी कांक्रीट की दीवार को जेसीबी की मदद से हटवाया है। यह दीवार कॉलोनाइजर प्रवीण उर्फ पप्पू बजाज द्वारा नाले के स्वरूप को बदलते हुए बनाई गई थी, जिसे प्रशासन ने कब्जे से मुक्त कराया।
प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण प्रयासों के तहत की गई। यह अतिक्रमण कटनी-शहडोल बाईपास के पास स्थित खिरहनी रपटा क्षेत्र में किया गया था, जहां प्राकृतिक नाले के प्रवाह को रोकते हुए सौंदर्यीकरण के नाम पर अवैध रूप से दीवार खड़ी कर दी गई थी। प्रकरण में कॉलोनाइजर पप्पू बजाज न्यायालय की शरण में भी गए थे, लेकिन मामला खारिज हो जाने के बाद एसडीएम प्रदीप मिश्रा के नेतृत्व में दो तहसीलदारों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर दो जेसीबी मशीनों की मदद से लगभग 15 फीट ऊंची दीवार को हटाने की कार्रवाई की।
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हालांकि, प्रवीण बजाज का कहना है कि यह जमीन उनकी निजी संपत्ति है और उन्होंने आमजन के हित में सौंदर्यीकरण कराया था। लेकिन, स्थानीय लोगों का दावा है कि यह कार्य उनकी कॉलोनी के हित में किया गया, यदि सार्वजनिक हित होता तो नाले के दोनों ओर समान कार्य किए जाते। एसडीएम प्रदीप मिश्रा ने स्पष्ट किया कि NGT के अनुसार कोई भी व्यक्ति प्राकृतिक नालों के स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। इस प्रकार की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, जिससे बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो।