खरगोन के भगवानपुरा तहसील के धूलकोट गांव के बाजार चौक में फाग उत्सव के दूसरे दिन आदिवासी भिलाला समाज द्वारा वर्षों से चली आ रही अनोखी परंपरा ‘गुड़ तोड़’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन हर दो वर्ष के अंतराल में किया जाता है। इस बार भी बड़ी संख्या में समाजजन और आसपास के जिलों से लोग इस पारंपरिक कार्यक्रम को देखने के लिए पहुंचे। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और भूमि पूजन से हुई। इसके बाद बाजार चौक में करीब 12 फीट ऊंचा खंभा गाड़ा गया। खंभे के ऊपरी हिस्से में लाल कपड़े में गुड़ और चने की पोटली बांधकर लटका दी गई। इस पोटली को उतारना ही ‘गुड़ तोड़’ परंपरा का मुख्य आकर्षण होता है।
पोटली उतारने के लिए युवाओं की टोलियां आगे बढ़ती हैं, लेकिन इस दौरान बालिकाएं और महिलाएं युवाओं पर सोटियां बरसाती हैं। सोटियों की मार से बचते हुए युवाओं को खंभे तक पहुंचकर पोटली उतारने की कोशिश करनी होती है। इसी वजह से यह आयोजन बेहद रोमांचक और आकर्षक बन जाता है।
पढ़ें: नरसिंहपुर के जैन मंदिर में देर रात चोरी: चार ताले तोड़कर ले गए मूर्तियां और नगदी, जांच में जुटी पुलिस
परंपरा के अनुसार पोटली को सात बार खंभे पर बांधा जाता है और उतारा जाता है। हर बार युवाओं की टोलियां पूरे जोश और उत्साह के साथ पोटली तक पहुंचने की कोशिश करती हैं। इस रोचक आयोजन को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटी रही और दर्शकों ने भी युवाओं का उत्साह बढ़ाया।
बताया गया कि इस आयोजन में मंडलोई और मौरे परिवार के सदस्य विशेष रूप से शामिल होते हैं। कार्यक्रम में धूलकोट गांव के आदिवासी भिलाला समाज के लोग ही भाग लेते हैं। हालांकि इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर और खंडवा जिलों के आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
समाज के बुजुर्गों और महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है और समाज की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। गांव के पटेल विजय सिंह सोलंकी ने बताया कि यह आयोजन समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देता है।
इस अवसर पर समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-मांदल की थाप और डीजे की धुन पर जमकर नाचे और गाए। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा। कार्यक्रम में पटेल विजय सिंह सोलंकी सहित समाजजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।