खरगोन की सतपुड़ा की पहाड़ियों से एक दिलचस्प और दुर्लभ दृश्य सामने आया है। यहां पहाड़ी की एक गुफा के पास उल्लू की दुर्लभ प्रजाति के दो बच्चे बैठे हुए दिखाई दिए। यह दृश्य भगवानपुरा विकासखंड के वनग्राम धरमपुरी क्षेत्र का बताया जा रहा है। तस्वीरों और वीडियो में दोनों बच्चे सामान्य उल्लू की प्रजातियों से अलग दिखाई दे रहे हैं, जिससे क्षेत्र में लोगों के बीच कौतूहल का माहौल बन गया है।
सतपुड़ा के घने जंगल अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं। यहां कई प्रकार के वन्य प्राणी, जीव-जंतु और पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में दुर्लभ प्रजाति के उल्लू का दिखाई देना जंगल की प्राकृतिक समृद्धि और रहस्यमयता को और बढ़ाता है।
इस संबंध में शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र रावल ने बताया कि भारत में उल्लू की 20 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जो अपने आकार, रंग और बनावट के आधार पर एक-दूसरे से अलग होती हैं। इनमें मुख्य रूप से स्पॉटेड उल्लू, इंडियन ईगल उल्लू और ब्राउन फिश उल्लू जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि तस्वीरों में दिखाई दे रहे उल्लू के बच्चे संभवतः इंडियन रॉक ईगल आउल (भारतीय ईगल उल्लू) के हैं, जिसका वैज्ञानिक नाम बूबो बेंगलेंसिस है। यह पक्षी मुख्य रूप से रात्रिचर होता है, इसलिए दिन के समय बहुत कम दिखाई देता है।
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डॉ. रावल के अनुसार प्राकृतिक आवास में कमी और भोजन की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इनकी संख्या धीरे-धीरे घटती जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड डाटा बुक में फिलहाल इसे ‘न्यूनतम चिंता’ की श्रेणी में रखा गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि उल्लू को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित पक्षियों की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में इनके प्राकृतिक आवास और पर्यावरण को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, ताकि यह दुर्लभ प्रजाति भविष्य में भी जंगलों में सुरक्षित रह सके।
उल्लू के इन बच्चों को देखने के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच उत्सुकता का माहौल बना हुआ है और यह दृश्य प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। वहीं इस मामले में वन विभाग के एसडीओ हीरालाल पटेल ने बताया कि आपके माध्यम से सूचना मिली है और मामले की जानकारी ली जा रही है।