अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने से सोना-चांदी के दामों में उछाल आया है। इससे सोना-चांदी की ग्राहकी करीब 20 प्रतिशत की कमी आई है। दामों में वृद्धि व वर्षाकाल के चलते पिछले तीन-चार माह से रतलाम के सराफा बाजार में मंदी का माहौल था। वहीं देश-विदेश में शुद्धता व खरा सोना के लिए प्रसिद्ध रतलाम के सराफा बाजार में नवरात्र शुरू होने से रौनक फिर से लौटने लगी है तथा काराबारियों को दीवापली व आने वाले लग्नसरा (फेस्टिवल सीजन) में अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है। पहली नवरात्र से अनेक वस्तुओं पर जीएसटी दर घटी है, लेकिन सोना-चांदी पर जीएसटी दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
रतलाम का सराफा बाजार देशभर तथा आसपास के देशों में में सोने की शुद्धता और आभूषणों की कारीगरी के लिए अपनी अलग ही पहचान बनाए हुए है। रतलाम में 92 टंच का खरा सोना बेचा जाता है, जबकि सरकार ने करीब दस वर्ष पहले होलमार्क सिस्टम लागू किया और उसके तहत 91.60 टंच मानक तय किया था, लेकिन रतलाम का सोना होलमार्क के मानक से भी अधिक है। देशभर के साथ ही कई देशों में भी लोग रतलाम की शुद्धता पर विश्वास व जेवरों पर यहां के कारीगरों द्वारा की जाने वाली बेहतरीन कारीगरी को ज्यादा पंसद करते हैं। यही कारण है कि राजस्थान, बिहार, गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र सहित अनेक राज्यों के परिवार सोना खरीदने रतलाम आते हैं।
रतलाम में करीब 400 दुकानें हैं तथा पिछले कुछ वर्षों से बड़े शो रूम भी खुलने लगे हैं। रतलाम का सोना अपने शुद्ध मानक (4/4) अथवा 92 प्रतिशत (टंच) खरा होने के कारण अलग पहचान रखता है। इस मानक की छाप भी रतलाम के जेवरों पर होती है। शुद्धता की ईमानदारी के चलते ग्राहकों का भरोसा रतलाम के बाजार में बना हुआ है तथा यही भरोसा यहां के सराफा बाजार को नंबर वन बनाता है। जयपुर से खरीदने आई प्रतिभा मिश्रा ने बताया कि चालीस-पचास साल से उनका परिवार रतलाम से ही सोने-चांदी के जेवर खरीद रहा है। रतलाम के सोने की यह विशेषता है कि रतलाम के सोने की चमक ही अलग है, यहां का सोना कभी न काला पड़ता है न उसका रंग फीका पड़ता है।मंदसौर से परिवार के साथ सोने के जेवर लेने आईं संगीता पाटीदार ने बताया कि रतलाम का सोना शुद्ध होता है, यहां के जेवरों पर अच्छी कारीगरी होती है तथा जब भी बेचो 92 टंच के हिसाब से वापस कीमत मिलती है।
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इसलिए प्रसिद्ध है रतलाम का सोना
भारत का रतलाम सराफा बाजार एकमात्र ऐसा बाजार है, जहां 92% शुद्ध सोना मिलता है। जबकि अन्य शहरों में सोने की शुद्धता 75 से 90 प्रतिशत तक रहती है। यहां का बाजार 24 कैरेट सोने के लिए प्रसिद्ध है, जो सबसे मुलायम व शुद्ध सोना होता है। यहां जेवरों में 24 कैरेट सोने का उपयोग किया जाता है। यहां के सोने के जेवरों की गुणवत्ता अन्य शहरों में बिकने वाले जेवरों से बेहतर मानी जाती है। रतलाम में सोने-चांदी के करीब चार सौ दुकानों व अनेक शो रूम हैं। वहीं चार से पांच हजार बंगाली कारीगर हैं जो जेवरों पर कारीगरी करते हैं। यहां आठ से दस किलो सोना प्रतिदिन बिकता है और सोना व्यवसाय रतलाम का सबसे बड़ा कारोबार है। इसिलए अब शहर में नगर निगम भवन के सामने गोल्ड कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी कराया जा रहा है। दीपावली और लग्नसरा के सीजन में कारोबार बढ़ जाता है और अन्य प्रदेशों के विभिन्न नगरों से भी लोग सोना खरीदने रतलाम आते हैं।
सोना-चांदी में तेजी
सोना-चांदी के दामों में तेजी का रुख बना हुआ है। सोमवार को सोने के दाम में 1100 रुपए तोला की तेजी तो चांदी में 2700 रुपये किलो की तेजी रही। शनिवार को बाजार बंद होने के दौरान रतलाम में सोना 1.13 लाख 700 रुपये तोला (जीएसटी सहित) बिका था, जबकि सोमवार को सोने के दामों में वृद्धि दर्ज की गई तथा सोमवार को सोने के दाम 1.14 लाख 800 रुपए तोला रहे। वहीं चांदी के दाम शनिवार को 1.33 लाख 300 रुपए किलो (जीएसटी सहित) थे तो सोमवार को दाम 1.36 लाख रुपये किलो हो गए।
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जीएसटी एक प्रतिशत करना चाहिए
रतलाम सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष झमक भरगट ने बताया कि अमेरिका द्वारा 25 से 50 प्रतिशत टैरिफ कर दिया गया है, इससे सोने और चांदी पर टैरिफ का असर पड़ा है तथा दाम बढ़े हैं। शुद्ध सोना-चांदी पर पहले आधा प्रतिशत तथा जेवरों पर एक प्रतिशत टैक्स लगता था। करीब दस वर्ष से सोना-चांदी पर तीन प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है। सरकार को शुद्ध सोने पर आधा प्रतिशत तथा जेवरों पर एक प्रतिशत जीएसटी लगाना चाहिए। इससे सरकार को ज्यादा टैक्स मिलेगा तथा व्यापारी भी ईमानदारी से काम करेंगे तथा अपनी बुक भी सरकार को इमानदारी से बताएंगे। वही ग्राहकों को भी फायदा होगा, क्योंकि टैक्स का सीधा असर ग्राहकों पर होता है। रतलाम में शुद्ध सोना-चांदी की पहचान हमारे बुजुर्गों द्वारा चार बाय चार के जेवरों का निर्माण करने की वर्षों पहले की गई शुरुआत से हुई। रतलाम में जितने भी जेवर हैं, वे 92 टंच के मिलते हैं। रतलाम के सराफा बाजार में देशभर के ही विदेशों (आसपास के देशों) से भी लोग जेवर ख्ररीदने आते हैं। सरकार ने पूरे देस में 91.60 टंच का हालमार्क लगवाया, यह अच्छा किया, ताकि पूरे देश में 91.60 टंच के जेवर बिके, लेकिन हम सरकार के कहने के बाद भी आधा टंच ज्यादा सोना बेच रहे हैं।
फेस्टिवल सीजन में बढ़ेगी ग्राहकी
सराफा व्यापारी कीर्ति बड़जात्या ने बताया कि सोना-चांदी पर जीएसटी कम होने की उम्मीद थी, लेकिन नहीं हुई। खुशी है कि जीएसटी दर बढ़ाई भी नहीं गई। अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ, विभिन्न देशों में होने वाले टकरावों दामों में वृद्धि हो रही है, लेकिन जब एक बार दाम बढ़ जाते है तो फिर कम नहीं होते। दाम बढ़ने से करीब 20 प्रतिशत ग्राहकी कम हुई है। मानसून खत्म होने को है तथा नवरात्रि शुरू होने के साथ ही फेस्टिवल सीजन प्रारंभ हो गया है। फेस्टिवल सीजन में कारोबार अच्छा होने की उम्मीद है।