आज से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाला यह पर्व मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की आराधना का विशेष समय माना जाता है। आमतौर पर नवरात्र 9 दिन तक मनाया जाता है लेकिन इस बार चतुर्थी तिथि दो दिन होने के कारण 10 दिन तक नवरात्र मनाया जाएगा।
बाड़मेर के पंडित ओमप्रकाश जोशी ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है। यह शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजे से 11 बजे तक है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 12:06 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक रहेगा। पंडित जोशी के अनुसार कलश स्थापना से घर में देवी का आगमन होता है और माता अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।
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कलश स्थापना की विधि बताते हुए पंडित जोशी ने कहा कि लाल कपड़े पर चौकी सजाकर थोड़े चावल से सोलह अष्ठ बनाए जाएं। बीच में मिट्टी के कलश में साफ पानी भरकर उसमें आम के पत्ते, सुपारी, चावल, सिक्का और पंचरत्न रखें। कलश के ऊपर नारियल रखकर लाल चुनरी बांधें। इसके बाद कलश के पास देवी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। फिर घी और तेल के दीपक जलाकर, अक्षत, फूल और धूप अर्पित करें और मां दुर्गा का आह्वान करें।
पंडित जोशी ने बताया कि कलश के पास बाढ़ी में गेहूं या जौ बोकर इसे नवरात्रि के 9 दिनों तक रखा जाता है। घर में कलश स्थापित करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।