सागर के बंडा क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां उल्दन बांध परियोजना के मुआवजा वितरण में हुई कथित मनमानी और विस्थापन नीति के विरोध में तीन युवक करीब 100 मीटर ऊंचे बिजली के टॉवर पर चढ़ गए। युवकों ने टॉवर के ऊपर से ही सोशल मीडिया पर लाइव आकर इस बात की जानकारी दी, जिससे प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। करीब 14 घंटे चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासनिक आश्वासन पर तीनों युवक नीचे उतरे।
सुबह 7 बजे टॉवर पर चढ़े, सोशल मीडिया पर किया लाइव
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब सात बजे किरोला गांव के तीन युवक रवि अहिरवार, ब्रजेश यादव और संजय पटेल डूब क्षेत्र से शिफ्ट की जा रही हाइटेंशन बिजली लाइन के करीब 100 मीटर ऊंचे टॉवर पर चढ़ गए। टॉवर पर चढ़कर उन्होंने मोबाइल से सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो शुरू कर दिया। वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया, जिसके बाद परिजनों सहित पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही तहसीलदार, थाना प्रभारी, जल संसाधन विभाग के अफसर और पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
'बहुत हुए आश्वासन, आज ही चाहिए 6.36 लाख के चेक'
टॉवर पर चढ़े युवकों का आरोप है कि उनके मकान बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। अवार्ड पारित होने के समय वे 18 वर्ष से अधिक आयु के थे, इसके बावजूद उन्हें नियम के मुताबिक मिलने वाला 6.36 लाख रुपए का विस्थापन पैकेज नहीं दिया गया। अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें नीचे आने के लिए काफी समझाइश दी, लेकिन युवक अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि बहुत आश्वासन हो गए, अब तो 6.36 लाख के चेक आज की तारीख में चाहिए, तभी नीचे उतरेंगे।
युवक सुबह से लेकर रात तक करीब 14 घंटे तक टॉवर पर ही डटे रहे। चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच जब उन्हें प्यास लगी, तो नीचे खड़े लोगों ने पानी की बोतलें ऊपर की ओर फेंकीं। युवक बोतल कैच करने के लिए थोड़ा नीचे उतरते और फिर बोतल लेकर वापस टॉवर के ऊपरी हिस्से पर चढ़ जाते। यह दृश्य देखकर नीचे खड़े परिजनों और प्रशासनिक अधिकारियों की सांसें अटकी रहीं।
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एसडीएम बोले- जिनके अवार्ड रिजेक्ट, वे कोर्ट जाएं
गतिरोध बढ़ता देख पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी ने बंडा एसडीएम से मोबाइल पर बात की। एसडीएम ने दोटूक कहा कि जिन लोगों के अवार्ड रिजेक्ट हो चुके हैं, उनके लिए प्रशासन कुछ नहीं कर सकता, उन्हें धारा 64 के तहत कोर्ट जाना होगा। हालांकि, जो पात्र लोग किन्हीं कारणों से वंचित रह गए हैं, उनके लिए विशेष शिविर लगाकर मुआवजा देने का काम किया जाएगा।
रात 9 बजे इन दो आश्वासनों के बाद खत्म हुआ गतिरोध
मामला बढ़ता देख प्रशासन को झुकना पड़ा। रात करीब 9.05 बजे बंडा तहसीलदार ने युवकों को दो प्रमुख आश्वासन दिए जिनमें तीनों युवकों को विस्थापन स्थल पर रहने के लिए पट्टे दिए जाएंगे। 6.36 लाख रुपये के पैकेज के लिए वे कोर्ट में अपना केस लड़ें। तहसीलदार के इस ठोस आश्वासन के बाद तीनों युवक सुरक्षित नीचे उतर आए। युवकों के नीचे उतरते ही प्रशासन और पुलिस ने राहत की सांस ली। फिलहाल क्षेत्र में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।