सीहोर की पावन धरती से अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने विश्व को शांति का संदेश दिया। महादेव की होली के आयोजन के दौरान उन्होंने ईरान-इस्राइल युद्ध पर चिंता जताते हुए कहा कि युद्ध से केवल विनाश होता है, विकास नहीं। उन्होंने महादेव से प्रार्थना की कि अब दुनिया में शांति स्थापित हो और मानवता को इस विनाश से मुक्ति मिले।
सीवन नदी के तट पर आयोजित महादेव की होली के अवसर पर उन्होंने वैश्विक हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें युद्ध की आग केवल विनाश ही फैलाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध कभी भी किसी देश का भला नहीं करता। युद्ध से न तो विकास होता है और न ही मानवता को कोई लाभ मिलता है। इससे केवल शहर उजड़ते हैं, परिवार टूटते हैं और इंसानियत कराह उठती है।
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ईरान-इस्राइल युद्ध पर जताई चिंता
पंडित मिश्रा ने मीडिया से चर्चा करते हुए वर्तमान वैश्विक हालातों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विशेष रूप से ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे तनाव और युद्ध की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसी परिस्थितियां बन रही हैं, जिससे पूरा विश्व प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब जितना युद्ध होना था हो चुका, अब समय आ गया है कि दुनिया के सभी देशों के हृदय में शांति स्थापित हो। उन्होंने कहा कि बाबा देवों के देव महादेव से प्रार्थना है कि वे सभी राष्ट्रों पर अपनी कृपा बनाए रखें और मानवता की रक्षा करें। पंडित मिश्रा के अनुसार, युद्ध की स्थिति में सबसे ज्यादा पीड़ा उन लोगों को होती है जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं होता। छोटे-छोटे बच्चे, मजदूर, व्यापारी और आम नागरिक युद्ध की त्रासदी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
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सिद्धपुर की प्राचीन परंपरा का किया उल्लेख
इस अवसर पर पंडित प्रदीप मिश्रा ने सीहोर के प्राचीन इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सीहोर का प्राचीन नाम सिद्धपुर था और यह नगर मां सीवन नदी के तट पर बसा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में इस नगर में सीवन नदी के किनारे 108 शिव मंदिर हुआ करते थे। भक्तजन इन मंदिरों में जाकर भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करते थे और गुलाल चढ़ाकर होली मनाते थे। भक्त पहले सीवन नदी में स्नान करते थे और फिर शिव मंदिरों में जाकर भक्ति भाव से होली का पर्व मनाते थे। यह परंपरा सदियों तक यहां जीवित रही।
नवाबी दौर में बदल गई थी परंपरा
पंडित मिश्रा ने बताया कि समय के साथ जब नवाबी शासन का दौर आया तो इस प्राचीन परंपरा में बदलाव आ गया। उन्होंने कहा कि उस समय नवाबों के सामने होली खेलने की परंपरा शुरू कर दी गई और धीरे-धीरे मंदिरों में होली खेलने की प्रथा समाप्त हो गई। लेकिन अब महादेव की होली के माध्यम से उसी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवित किया जा रहा है, ताकि लोग मंदिरों में जाकर सात्विक तरीके से भगवान शिव के चरणों में जल और गुलाल अर्पित कर त्योहार मनाएं।

पंडित मिश्रा ने महादेव से मांगी विश्व शांति- फोटो : credit