मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के किसानों का सब्र अब टूट चुका है। लगातार पांच वर्षों से प्राकृतिक आपदा के कारण सोयाबीन की फसल बर्बाद हो रही है, लेकिन सरकार से बीमा राशि अब तक नहीं मिली। सोमवार को नाराज किसानों ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। कोई पेड़ पर चढ़कर घंटियां बजा रहा था, तो महिलाएं खेतों में खराब फसल लेकर प्रदर्शन कर रही थीं।
बीमा कटौती हर साल, भुगतान कभी नहीं
किसानों का आरोप है कि सरकार हर साल उनकी फसल बीमा की राशि काट लेती है, लेकिन फसल खराब होने के बाद भी मुआवजा नहीं देती। छापरी के बने सिंह, रामा खेड़ी के मोतीलाल और कुलान्स खुर्द के रमेश वर्मा सहित कई किसानों का कहना है कि आर्थिक हालात इतने खराब हैं कि भूखों मरने की नौबत आ गई है।
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गांव-गांव में अलग अंदाज का आंदोलन
समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में किसान ग्राम चंदेरी, रामखेड़ी, उलझामन, कुलान्स कला, ढाबला, कुलान्स स खुर्द, छापरी, सेवनिया और संग्रामपुर में आंदोलन कर रहे हैं। कहीं महिलाएं हाथ में खराब सोयाबीन लेकर नारे लगा रही हैं, तो कहीं किसान नदी में जल सत्याग्रह कर चुके हैं। बावजूद इसके, सरकार ने अब तक सर्वे तक के आदेश नहीं दिए। ग्राम छापरी और सेवनिया की कांताबाई, सपना बाई, भूरी बाई और राम प्यारी बाई सहित कई महिलाएं खेतों में खराब फसल लेकर खड़ी थीं। उनका कहना था— हमारे बच्चे भूखे सो रहे हैं, खेतों में बर्बादी पड़ी है, लेकिन सरकार आंखें मूंदे बैठी है। ग्राम संग्रामपुर और छापरी के किसान पेड़ों पर चढ़कर लगातार घंटियां बजा रहे थे, ताकि उनकी आवाज सीधे सरकार तक पहुंचे। उनका कहना था कि घंटी की गूंज से अगर मंत्रियों और अफसरों का दिल नहीं पिघलता, तो फिर वे और उग्र आंदोलन करेंगे।
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पहले भी हो चुके हैं बड़े प्रदर्शन
इससे पहले ग्राम कुलान्स कला, ढाबला और उलझावन के किसान नदी में जल सत्याग्रह कर चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार किसानों को बस चुनावी वादों में याद करती है, लेकिन असल संकट में उन्हें अकेला छोड़ देती है। तुलसी विभाग के एडीए अनिल जाट ने कहा कि 2024 में खराब हुई फसलों की बीमा राशि आ चुकी है और जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, उनके खातों में एक-दो दिनों में पैसे पहुंच जाएंगे। कृषि विभाग के पास इसकी सूची भी आ रही है।