अवंतिका नगरी एक बार फिर विश्व पटल पर बौद्धिक विमर्श का केंद्र बन गई है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, आरएसएस विचारक सुरेश सोनी ने वसंत विहार स्थित तारामंडल परिसर में नवनिर्मित अत्याधुनिक साइंस सेंटर का शुभारंभ किया।
बाबा महाकाल की नगरी में शुक्रवार से महाकालः द मास्टर ऑफ टाइम पर आधारित प्रदर्शनी और तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन की शुरुआत हुई। इस दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, सांसद अनिल फिरोजिया, केएस मुरली डायरेक्टर जरनल सीआरटीएल, डॉ. वीके सारस्वत नीति आयोग के सदस्य, सुरेश सोनी, शिव कुमार शर्मा, डॉ गंती एस मूर्ति नेशनल कॉर्डिनेटर शामिल हुए।
कार्यक्रम मे महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए सुरेश सोनी ने कहा कि उज्जैन और डोंगला अब विश्व स्टैंडर्ड टाइम का केंद्र बन गए हैं। विज्ञान और अध्यात्म के इस संगम से उज्जैन के विकास के नए रास्ते खुलेंगे। उज्जैन पुराने समय से ही विज्ञान और अध्यात्म का केंद्र रहा है। यह बात ईपीएस से भी साबित हो चुकी है। प्रारंभ में अतिथियों ने आम लोगों के लिए भारतीय काल गणना, एस्ट्रोफिजिक्स और कॉस्मोलॉजी को सरल ढंग से प्रदर्शित किया।
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ज्ञान के द्वार खोलेगा साइंस सेंटर
15.20 करोड़ रुपए की लागत से केंद्र में तैयार साइंस सेंटर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान का नया द्वार खोलेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में केंद्र सरकार ने 6.50 करोड़ और राज्य सरकार ने 8.56 करोड़ रुपए का निवेश किया है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह केंद्र न केवल विज्ञान के प्रति रुचि जगाएगा, बल्कि खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उज्जैन की प्राचीन प्रतिष्ठा को भी पुनर्स्थापित करेगा।
वैज्ञानिक करेंगे काल गणना पर मंथन
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित जापान और अन्य देशों के खगोलविद, नीति-निर्माता और अंतरिक्ष विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन का मकसद भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच तालमेल बिठाना है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत और इसरो के वैज्ञानिकों की मौजूदगी में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन के रूप में स्थापित करने और भारतीय काल गणना के वैज्ञानिक आधार पर गहन चर्चा की जाएगी।
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15.20 करोड़ की लागत से बना साइंस सेंटर
तारामंडल परिसर में तैयार किए गए इस अत्याधुनिक साइंस सेंटर के निर्माण पर 15.20 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं, जिसमें केंद्र सरकार ने 6.50 करोड़ और राज्य सरकार ने 8.56 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। यहां विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद, शिक्षाविद, नीति-निर्माता और अंतरिक्ष विशेषज्ञ भाग लेंगे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच समन्वय स्थापित करना है।
इसका भी हुआ भूमिपूजन
उज्जैन सिंहस्थ के लिए 19 किमी लंबे फोर लेन बायपास का भूमिपूजन किया गया। यह सड़क 701 करोड़ रुपए में बनेगी। वहीं 22 करोड़ से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल का विस्तारीकरण होगा। कार्यक्रम का आयोजन वसंत विहार स्थित तारामंडल परिसर में किया जा रहा है।