उज्जैन के महाकाल मंदिर के गर्भगृह में इंदौर के विधायक गोलू शुक्ला के पुत्र रुद्राक्ष शुक्ला द्वारा कथित अनाधिकृत प्रवेश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। कांग्रेस ने मंदिर प्रशासक कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
तेज बारिश के बावजूद शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च निकाला। महाकाल मंदिर परिसर तक पहुंचकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता रवि राय ने कहा कि विधायक और उनके पुत्र पर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिस प्रकार आम दर्शनार्थियों को गर्भगृह में प्रवेश पर दंडित किया जाता है, उसी तरह इन लोगों पर भी कार्रवाई हो। कांग्रेस ने यह भी मांग की कि प्रतिदिन दोपहर 12 से चार बजे तक आम जनता को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जाए।
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पूर्व में आम श्रद्धालु को जेल, अब क्यों नहीं कार्रवाई?
कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने आईजी उमेश जोगा और एसपी प्रदीप शर्मा को पत्र लिखते हुए कहा है कि जब पहले एक आम श्रद्धालु को गलती से गर्भगृह में प्रवेश करने पर तत्काल जेल भेज दिया गया था, तो अब भाजपा विधायक के पुत्र पर नरमी क्यों बरती जा रही है। उन्होंने रुद्राक्ष शुक्ला पर तत्काल मामला दर्ज कर उसे जेल भेजने की मांग की है।
हर साल कांवड़ यात्रा से आते हैं विधायक
विधायक गोलू शुक्ला हर वर्ष इंदौर से कांवड़ यात्रा लेकर महाकाल मंदिर पहुंचते हैं। इस बार भी रविवार रात को वे सैकड़ों कांवड़ियों के साथ उज्जैन पहुंचे थे। सोमवार तड़के वे महाकाल को जल अर्पित करने गर्भगृह में घुस गए। हालांकि अन्य कांवड़िए दूर से ही दर्शन कर लौट गए। बताया गया कि उनके पुत्र रुद्राक्ष शुक्ला ने भी जबरन गर्भगृह में प्रवेश किया और रोकने पर कर्मचारियों से विवाद किया।
सीसीटीवी बंद, लाइव टेलीकास्ट रुका
घटना के समय मंदिर के हाईटेक सीसीटीवी कैमरे बंद हो गए थे और लाइव टेलीकास्ट भी रुक गया था। इससे घटना की गंभीरता और संदिग्धता और बढ़ गई। मंदिर प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
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तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, जो मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। समिति में मंदिर उप प्रशासक एस. एन. सोनी, सुरक्षा अधिकारी जयंत सिंह राठौड़ और सहायक प्रशासक हिमांशु कारपेंटर को शामिल किया गया है। समिति को सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
नियम साफ, फिर भी उल्लंघन क्यों?
महाकाल मंदिर के नियमों के अनुसार, गर्भगृह में केवल पुजारी, संत, महामंडलेश्वर, शंकराचार्य या राजकीय अतिथि ही मंदिर प्रशासक की अनुमति से प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे में विधायक और उनके पुत्र का गर्भगृह में प्रवेश न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासन की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है।