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Vidisha News: भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे कलाकार, मूर्तियों पर दिख रहा महंगाई का असर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विदिशा Published by: विदिशा ब्यूरो Updated Fri, 06 Sep 2024 04:57 PM IST
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ujala utsav : मध्यप्रदेश के विदिशा में गणेश जन्मोत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में है, कलकत्ता से आए मूर्तिकारों ने गणेश प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप दे कर तैयार कर दिया है। कहते हैं पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार इस दुनिया को भगवान ने बनाया है, लेकिन इस दुनिया में भी कुछ ऐसे लोग हैं, जो भगवान को बनाने का कार्य करते हैं। अगर आपने भगवान को बनाने वाले को नहीं देखा है तो आज हम आपको उनके बीच लेकर चलते है, जहां आप भगवान को बनते हुए देख पाएंगे।
अबसे महज कुछ घंटों के बाद देशभर में गणेश जन्मोत्सव की धूम प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में विदिशा सहित बाहर से आए कलाकारों के द्वारा गणेश और दुर्गा की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। समय पर भक्तों को ये प्रतिमाएं उपलब्ध हो सकें इसलिए मूर्तियों को अंतिम रूप देने के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है। मूर्तिकारों का कहना है कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार 8 से 10 फीट की ही मूर्तियां उन्होंने बनाई हैं। मूर्तियां बनाने के लिए विशेष रूप से कोलकाता (कलकत्ता) से ही मिट्टी मंगाई जाती है। पिछली बार की अपेक्षा इस बार मिट्टी डेढ़ गुना महंगी हुई है, इसके साथ ही भाड़ा भी बढ़ गया है।
वहीं, मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री जैसे बांस और कपड़े के साथ लकड़ी सहित मूर्तियों के निर्माण में आने बाली अन्य सामग्रियों पर भी महंगाई की भारी मार पढ़ी है। इसका सीधा असर मूर्ति की कुल कीमत पर पढ़ रहा है। मूर्तिकार बताते हैं कि भगवान की मूर्तियों में उपयोग होने वाली सामग्रियों पर 12 प्रतिशत से अधिक जीएसटी लगाया जाता है। इसका असर सीधे ग्राहकों पर होता है और इसी के चलते इस वर्ष भी मूर्तियों की कीमत में भारी इजाफा हुआ है।
मुर्तिकार बताते हैं कि भगवान की मूर्तियों का निर्माण करने के लिए पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाता है। प्रकृति को नुकसान ना हो इसके लिए बाकायदा हर्बल कलर का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि मूर्ति बनाने में मिट्टी और घास का उपयोग करके ही मूर्तियों को तैयार किया जाता है। इसे लकड़ी की चौखट पर व्यवस्थित बनाया जाता है, जिससे की विसर्जन के बाद पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान ना हो।
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