एक ओर सरकार गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक लापरवाही इन योजनाओं की साख पर सवाल खड़े कर रही है। ताजा मामला विदिशा जिले की नटेरन तहसील के ग्राम रायखेड़ी से सामने आया है, जहां एक कुंवारी लड़की की शादी सरकारी रिकॉर्ड में पहले ही दर्ज कर दी गई।
ग्राम रायखेड़ी निवासी खुशीलाल कुशवाहा अपनी बेटी दुर्गेश का विवाह मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत कराने के लिए आवेदन करने पहुंचे थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने ऑनलाइन जानकारी दर्ज करनी चाही, सिस्टम में दिखा कि उनकी बेटी की शादी पहले ही हो चुकी है। यह देखकर परिवार हैरान रह गया। एक ऐसी बेटी, जिसकी अब तक शादी नहीं हुई, उसे कागजों में दुल्हन बना दिया गया।
इस गंभीर गड़बड़ी के बाद पीड़ित पिता ने पंचायत स्तर से लेकर तहसील और जिला कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन हर जगह उन्हें सिर्फ टालमटोल का सामना करना पड़ा। पहले ग्राम पंचायत सचिव ने नटेरन भेजा, वहां से उन्हें विदिशा जाने की सलाह दी गई। जब जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे, तो वहां भी जिम्मेदारों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मामला भोपाल स्तर से ही सुधरेगा।
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पीड़ित खुशीलाल कुशवाहा का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं है, फिर भी उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “जब अधिकारियों ने मेरी बेटी की शादी कागजों में कर ही दी है, तो अब दामाद और ससुराल भी ढूंढकर दे दें।” यह बयान उनकी पीड़ा और सिस्टम की संवेदनहीनता को साफ दर्शाता है।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, ऐसे में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना उनके लिए बड़ा सहारा थी। लेकिन इस गड़बड़ी ने उनके सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। लड़की के भाई अभिषेक कुशवाहा ने बताया कि पिछले 15 दिनों से उनके पिता लगातार दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं मिला। हर जगह केवल आश्वासन मिल रहा है, कार्रवाई कहीं नजर नहीं आ रही।
यह मामला केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। सवाल यह भी उठता है कि जब एक कुंवारी लड़की की शादी कागजों में दर्ज हो सकती है, तो ऐसे कितने और मामले होंगे जो अब तक सामने नहीं आए हैं। सरकार की मंशा जहां जरूरतमंदों की मदद करना है, वहीं कुछ लापरवाह कर्मचारी इन योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। फिलहाल, खुशीलाल कुशवाहा का परिवार न्याय की उम्मीद में भटकने को मजबूर है और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग कर रहा है।