{"_id":"69fc1d1d2dfcd466270a0d33","slug":"video-the-jathedars-appointed-by-the-sarbat-khalsa-have-welcomed-the-anti-sacrilege-law-2026-05-07","type":"video","status":"publish","title_hn":"सरबत खालसा द्वारा नियुक्त जत्थेदारों ने बेअदबी विरोधी कानून का किया स्वागत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरबत खालसा द्वारा नियुक्त जत्थेदारों ने बेअदबी विरोधी कानून का किया स्वागत
सरबत खालसा द्वारा नियुक्त जत्थेदार भाई ध्यान सिंह मंड और अन्य पंथक नेताओं ने पंजाब विधानसभा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकने के लिए पारित सख्त कानून का स्वागत किया है। जत्थेदार मंड ने कहा कि यह फैसला भले देर से लिया गया हो, लेकिन “देर आए दुरुस्त आए” वाली बात है। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब पूरी मानवता के गुरु हैं और उनकी बेअदबी रोकने के लिए किया गया हर कानूनी प्रयास स्वागत योग्य है।
जत्थेदार मंड ने शिरोमणि अकाली दल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि अकाली शासन के दौरान हुई बेअदबी घटनाओं में दोषियों को पकड़ने के बजाय राजनीतिक हितों के लिए उन्हें संरक्षण दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसजीपीसी अब पंथ की नहीं बल्कि बादल परिवार की प्रवक्ता बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के 116 सदस्यों ने सर्वसम्मति से कानून पारित किया, जबकि बादल परिवार से जुड़े सदस्य सदन से गैरहाजिर रहे, जो उनकी पंथ के प्रति गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।
मौजूदा जत्थेदारों की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए मंड ने कहा कि अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की ताजपोशी हमेशा संगत की मौजूदगी में होती रही है, लेकिन वर्तमान जत्थेदारों की नियुक्ति रात के अंधेरे में और गुप्त तरीके से की गई, जिसे पंथ स्वीकार नहीं करता। उन्होंने आरोप लगाया कि ये जत्थेदार पंथ की आवाज उठाने के बजाय लिफाफा कल्चर के तहत बादल परिवार के निर्देशों पर काम कर रहे हैं।
पंथक नेताओं ने कहा कि विधानसभा एक पवित्र सदन है और वहां सर्वसम्मति से लिया गया फैसला सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं, उनकी राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है। मंड ने कहा कि अगर कोई सरकार अच्छा काम करती है तो उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पहले बेअदबी के आरोपियों को कुछ महीनों में जमानत या सरकारी संरक्षण मिल जाता था, लेकिन नए कानून से ऐसे तत्वों पर लगाम लगेगी।
इस दौरान बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया गया। नेताओं ने कहा कि जो सिख अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, उन्हें रिहा न करना मानवाधिकारों और कानून दोनों के खिलाफ है। भाई बलवंत सिंह राजोआणा के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने पुराने जत्थेदारों पर भी निशाना साधा।
अंत में जत्थेदार मंड ने खालसा पंथ से अपील की कि राजनीतिक दलों और गुटबाजी से ऊपर उठकर गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान के लिए बनाए गए इस कानून का समर्थन किया जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से एसजीपीसी चुनाव समय पर करवाने की मांग भी की, ताकि संस्था को “एक परिवार के कब्जे” से मुक्त कराया जा सके।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।