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15 मिनट की बारिश में डूबा जगराओं, जल निकासी व्यवस्था की खुली पोल
जगराओं में बुधवार को हुई महज 15 मिनट की बारिश ने नगर काउंसिल की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। बारिश के बाद शहर की कई प्रमुख सड़कें और गली-मोहल्ले पानी से लबालब भर गए। स्कूलों की छुट्टी के समय हुई बारिश के कारण बच्चों और उनके अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
स्कूलों से बच्चों को लेने पहुंचे अभिभावकों ने नगर काउंसिल और जनप्रतिनिधियों पर तंज कसते हुए कहा कि शायद जगराओं देश का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां 15 मिनट की बारिश में ही सड़कें और गली-मोहल्ले स्विमिंग पूल का रूप ले लेते हैं।
बारिश के दौरान कई स्थानों पर पानी इतना भर गया कि दोपहिया वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए। कई अभिभावक अपने वाहनों पर बच्चों को लेने में असमर्थ रहे, जबकि छोटे-छोटे बच्चे घुटनों तक भरे पानी में पैदल घर जाने को मजबूर हुए। कुछ बच्चे पानी से बचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशते नजर आए।
शहर के माता चिंतपूर्णी मंदिर के सामने भी भारी जलभराव हो गया, जिससे राहगीरों को निकलने में काफी दिक्कत हुई। वहीं हर साल की तरह सब्जी मंडी रोड, कमल चौक और कुक्कड़ चौक समेत कई प्रमुख सड़कें पानी से लबालब भर गईं। इससे नाराज लोगों ने नगर कौंसिल, नेताओं और पार्षदों के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
चार-चार फुट चौड़े नाले और छप्पड़ हुए गायब
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर काउंसिल कार्यालय से डिस्पोजल रोड तक दोनों ओर पहले चार-चार फुट चौड़े खुले नाले बने हुए थे। इसके अलावा शहर में कई बड़े छप्पड़ (तालाब) भी थे, जहां बारिश का पानी एकत्र होता था। समय के साथ ये नाले बंद हो गए और कई छप्पड़ों पर कथित रूप से कब्जे हो गए, जिससे पानी की निकासी का प्राकृतिक तंत्र पूरी तरह प्रभावित हो गया।
लोगों का कहना है कि यदि पुराने छप्पड़ों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और बंद पड़े नालों को दोबारा खोला जाए तो शहर में जलभराव की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनाज मंडी के बड़े नाले, जो सीधे डिस्पोजल तक जाते थे, अब या तो खत्म हो चुके हैं या मलबा डालकर बंद कर दिए गए हैं। नगर काउंसिल द्वारा दोबारा बनाए गए कुछ नालों में भी लोगों ने मलबा डाल दिया, जिससे पानी की निकासी बाधित हो रही है।
बारिश के बाद सामने आए हालात ने एक बार फिर नगर काउंसिल की तैयारियों और शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से स्थायी समाधान निकालने और अतिक्रमण हटाकर जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।
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