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Rain spells trouble for farmers in Moga; thousands of acres of crops destroyed.
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मोगा में बारिश बनी किसानों के लिए मुसीबत, हजारों एकड़ फसल बर्बाद
पंजाब में लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की पक्की गेहूं की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। मोगा जिले के धर्मकोट क्षेत्र के कई गांव इस प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
दो दिन पहले हुई ओलावृष्टि में करीब 15–20 गांवों में हजारों एकड़ फसल तबाह हो गई थी। इसके बाद मंगलवार को फिर से हुई बारिश और ओलावृष्टि ने बची-खुची फसल को भी पूरी तरह खत्म कर दिया, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं। किसानों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि अधिकांश किसान ठेके पर जमीन लेकर खेती करते हैं और एक एकड़ जमीन के लिए उन्हें लगभग 80 हजार रुपये तक जमीन मालिक को देने पड़ते हैं। ऐसे में फसल बर्बाद होने से उन पर आर्थिक संकट और गहरा गया है।
प्रभावित गांवों में कंडियाल सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां लगभग 1100 एकड़ गेहूं की फसल खराब हो गई। इसके अलावा गांव कोट सदर खां में करीब 500 एकड़ फसल नष्ट हो गई। नूरपुर हकीमा, बाजेके, केला, बस्ती चिराग, शाह बकरवाला, शेरपुर तैयबा और रेहड़वा सहित कई गांवों में हजारों एकड़ फसल तबाह हो चुकी है। इस बार अचानक हुए मौसम परिवर्तन और ओलावृष्टि के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। आसमान पर बादल छाया हुए हे इस बार किसान के लिए बारिश आफत बन के बरसे ।
गांव कोट सदर खा के किसान देवेंद्र सिंह बताया कि उन्होंने ठेके पर लगभग 40 एकड़ जमीन लेकर गेहूं की खेती की थी। इसके लिए उन्होंने प्रति एकड़ 80 हजार रुपये के हिसाब से जमींदार को ठेका दिया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने आढ़तियों से कर्ज लेकर फसल की बुवाई की थी। लेकिन बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी पकी हुई गेहूं की फसल, जो कुछ ही दिनों में कटकर मंडी पहुंचने वाली थी, पूरी तरह बर्बाद हो गई। इस में से कुछ नहीं निकल न जो कि मंडी में हम ले जाए। पशुओं के लिए तूड़ी भी नहीं निकलना।सरकार से मांग हे हमे 50 हजार रुपए पार एकड़ के हिसाब से मुताबजा दे ताकि अगले फसल भी बिजाई कर सके और कर्ज से तोड़ी राहत मिले।
गांव कोट सदर खा के किसान बोड़ सिंह ने बताया कि उन्होंने 17 एकड़ ठेके पर जमीन लेकर गेहूं की बिजाई की थी जो कि बिल्कुल खत्म हो गया। पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। पहले धान की फसल बारिश से खराब हो गई थी और अब गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि किसानों की हालत को समझते हुए उन्हें फसल का उचित मुआवजा दिया जाए।
गांव कोट सदर खा के किसान सुरिंदर सिंह ने बताया कि उनकी 10 एकड़ गेहूं की फसल पूरी तरह खराब हो गई है। उनका कहना है कि सरकार केवल वादे करती है, लेकिन किसानों को कोई सहायता नहीं मिलती। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि किसान दोबारा खड़े हो सकें। उन्होंने यह भी बताया कि उनके गांव में करीब 400/500 एकड़ फसल पूरी तरह तबाह हो चुकी है, जबकि आसपास के अन्य गांवों में भी भारी नुकसान हुआ है।
हरजिंदर सिंह ने बताया कि उनकी 3 एकड़ फसल खराब हो गई है, जो अब किसी काम की नहीं रही। न तो उसमें से गेहूं निकल सकता है और न ही पशुओं के लिए तूड़ी मिल सकती है, जिससे उन्हें हर तरफ से नुकसान हुआ है।
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