नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के शालीमार स्थित राम मंदिर में दर्शन के बाद मंदिर परिसर में गंगाजल छिड़कने वाले भाजपा के पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा विवादों में घिर गए हैं। उनके इस कृत्य को लेकर कांग्रेस और दलित समाज ने कड़ा विरोध जताया है। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने आहूजा को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया।
कांग्रेस ने विरोध स्वरूप उसी राम मंदिर में रामधुनी का आयोजन किया, जिसमें पार्टी के जिला अध्यक्ष योगेश मिश्रा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दलित समाज के लोगों ने भाग लिया। इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए। पार्टी से निलंबन के बाद ज्ञानदेव आहूजा बैकफुट पर आ गए और सफाई देते हुए खुद को दलितों का समर्थक बताया। उन्होंने कहा, मैं हमेशा से दलितों के साथ खड़ा रहा हूं। मेवात से अपहरण कर लाई गई दलित समुदाय की 27 लड़कियों को मैंने वापस लाने में मदद की। तीन महीने पहले जिस दलित परिवार पर हमला हुआ, मैं उनके साथ खड़ा रहा। मैं दलितों का सबसे बड़ा मसीहा रहा हूं और आगे भी रहूंगा।
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आहूजा ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी जाति विशेष के खिलाफ कोई अपमानजनक शब्द नहीं कहे। उन्होंने बताया कि वे टीकाराम जूली के जन्मदिन पर उन्हें माला पहनाने गए थे, जबकि पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि वे जूली का सम्मान करते हैं, लेकिन कांग्रेस की ओछी मानसिकता के खिलाफ हैं। उधर, आहूजा के इस कृत्य के विरोध में कांग्रेस और दलित समाज के लोगों ने उसी राम मंदिर में पहुंचकर रामधुनी का जाप किया, जहां आहूजा ने गंगाजल का छिड़काव किया था।
भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल जिन्होंने आहूजा का निलंबन पत्र जारी किया है, उन्होंने बताया कि 9 नवंबर 1989 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास समारोह में पहली शिला एक दलित कामेश्वर चौपाल ने ही रखी थी। उन्होंने कहा कि भाजपा की सोच समावेशी रही है और इस तरह के कृत्य पार्टी की नीति के खिलाफ हैं। वहीं, ज्ञानदेव आहूजा ने अपनी सफाई में कहा कि उनका यह कदम कांग्रेस की क्षुद्र राजनीति के खिलाफ था, न कि दलितों के विरुद्ध। उन्होंने दोहराया कि वे हमेशा से दलितों का सम्मान करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे।