गंगाजल प्रकरण को लेकर दलित समाज में भारी रोष है। बुधवार को दलित समाज के लोगों ने अंबेडकर सर्किल से मिनी सचिवालय तक विरोध रैली निकालकर पूर्व विधायक और भाजपा नेता ज्ञानदेव आहूजा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। समाज के लोगों ने कहा कि आहूजा द्वारा मंदिर में गंगाजल छिड़कना और जातिसूचक भाषा का प्रयोग करना शर्मनाक है और इससे पूरे दलित समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
रैली का नेतृत्व जिला पार्षद जगदीश जाटव ने किया। उन्होंने कहा कि यह रैली आदरणीय टीकाराम जूली और पूरे दलित समाज के सम्मान में निकाली गई है। उन्होंने बताया कि रामनवमी के दिन कैबिनेट मंत्री टीकाराम जूली ने शालीमार स्थित राम मंदिर में दर्शन किए थे। इसके अगले ही दिन पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने मंदिर में गंगाजल छिड़का और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जो जातीय भेदभाव को दर्शाता है।
पढ़ें: द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता स्टेडियम के बाहर, छत पर बैठकर देखेंगे मैच; क्रीड़ा परिषद का अनूठा प्रयोग
जाटव ने कहा कि जिले में दो-दो मंत्री मौजूद हैं, लेकिन इस संवेदनशील मामले पर उनकी चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि वे भी इस कृत्य की मौन स्वीकृति दे रहे हैं।
समाज के लोगों ने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि आहूजा के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि इस प्रकार की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो समाज में असमानता और बढ़ेगी। रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रही। इस दौरान समाज के लोगों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि अब उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा और सम्मान मिलना चाहिए।