नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरिस्का में खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को बेजुबान वन्य जीवों की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि बेजुबानों की दहाड़ गूंजी ओर अंततः न्याय की जीत हुई। सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले ने यह सिद्ध कर दिया कि बेजुबानों की भी दहाड़ गूंजती है, बशर्ते वह सच्चे मन से लगाई जाए। सरिस्का के बाघों, जंगलों और प्रकृति की आत्मा को आज न्याय मिला है। इसके लिए जूली ने सर्वोच्च न्यायालय का हृदय से आभार प्रकट किया। जिसने न केवल हमारी बात को सुना, बल्कि सरकार के खनन-परस्त फैसले पर करारा तमाचा भी मारा।
सरकार द्वारा बिना वैज्ञानिक आधार, पारदर्शिता और पर्यावरणीय मूल्यांकन के जो नया CTH ड्राफ्ट तैयार किया गया था। उसे सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति न हो, सरिस्का टाइगर रिज़र्व में कोई भी खनन गतिविधि नहीं हो सकती। टहला क्षेत्र, जहां बाघिन ST-27 ने मई 2024 में दो शावकों को जन्म दिया, उसे CTH से हटाकर बफर ज़ोन बनाना न केवल नैतिक अपराध था, बल्कि वन्यजीव हत्या का परोक्ष षड्यंत्र भी।
सरकार के फैसले में न विज्ञान था, न जनसुनवाई, न पारदर्शिता, इसमें सिर्फ पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की लालसा छिपी थी। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र और राज्य दोनों जगह अलवर से ही चुने गए प्रतिनिधि वन मंत्री होने के बावजूद, सरिस्का जैसी धरोहर को बचाने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरिस्का का जंगल खनन माफिया या होटल लॉबी की संपत्ति नहीं है। यह बाघों की नर्सरी है, अलवर की शान है, राजस्थान की धरोहर है। जिसे कांग्रेस सरकारों ने CTH का विस्तार कर पुनर्जीवित किया और आज वहां 48 बाघों की दहाड़ गूंज रही है यह कांग्रेस की प्रतिबद्धता, वैज्ञानिक सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण का परिणाम है।
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सरिस्का को खनन की खान नहीं बनने देंगे, यह हमारी सांस्कृतिक, जैविक और भावनात्मक पूंजी है। इसकी रक्षा के लिए हम हर मंच पर, हर अदालत में, हर गाँव में ओर हर वन में मिलकर लड़ेंगे। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरिस्का टाइगर रिज़र्व में खनन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया है और इसे बेजुबानों की दहाड़ की जीत बताया है।
उन्होंने कहा कि CTH (क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट) को कमजोर करने और टहला क्षेत्र को बफर जोन घोषित करने की सरकारी योजना को कोर्ट ने फटकार लगाकर एक तरह से सिरे से खारिज कर दिया, जो वन्यजीवों की रक्षा के लिए बड़ा कदम है।
जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियां खनन माफिया और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के इरादे से बनाई गई थीं, जिसमें पारदर्शिता, वैज्ञानिक मूल्यांकन और जनसुनवाई पूरी तरह नदारद थीं। उन्होंने कहा कि सरिस्का देश और राजस्थान की धरोहर है और इसकी रक्षा के लिए कांग्रेस सरकारों ने हमेशा प्रतिबद्धता दिखाई है। आज सरिस्का में 48 बाघ हैं, जो कांग्रेस की पर्यावरणीय सोच का परिणाम है। उन्होंने दोहराया कि सरिस्का को खनन की खान नहीं बनने देंगे और हर मंच पर इसके संरक्षण के लिए संघर्ष करेंगे।