बाड़मेर राजकीय जिला अस्पताल में पिछले तीन से पांच वर्षों से सेवाएं दे रहे लगभग 100 नर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से हटाए जाने का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। पुनर्नियुक्ति की मांग को लेकर सोमवार को संविदाकर्मी अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
निवर्तमान नर्सिंग ऑफिसर प्रवीण राजपुरोहित के अनुसार, अस्पताल प्रशासन द्वारा चरणबद्ध तरीके से आदेश जारी किए गए। पहला आदेश 21 मई 2026 को आदेश क्रमांक 2026/940, दूसरा आदेश 29 मई 2026 को आदेश क्रमांक 2026/984 तथा तीसरा आदेश दो जून 2026 को आदेश क्रमांक 2026/1003 के तहत जारी किया गया। कर्मचारियों का दावा है कि इन आदेशों के माध्यम से लगभग 100 नर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया गया।
'बिना कोई स्पष्ट कारण बताए कार्यमुक्त कर दिया गया'
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। कर्मचारियों के अनुसार हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में आदेश पारित करते हुए आवश्यक कार्रवाई और पुनः जॉइनिंग से संबंधित निर्देश दिए हैं। उनका दावा है कि न्यायालय के आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करवाई जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक आदेश की पूर्ण पालना नहीं हुई है। वर्षों तक अस्पताल में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें बिना कोई स्पष्ट कारण बताए कार्यमुक्त कर दिया गया। जिससे उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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उत्कृष्ट और सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित भी हो चुके हैं कर्मचारी
कर्मचारियों ने आगे कहा कि हटाए गए कर्मचारियों में से लगभग 10 से 15 कर्मचारियों को समय-समय पर जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज स्तर पर उत्कृष्ट एवं सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, दो से चार नर्सिंग कर्मचारियों को जिला प्रशासन द्वारा जिला स्तर पर सम्मानित किया गया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे, लेकिन बिना उचित समाधान के उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। उन्होंने मांग की कि सभी प्रभावित कर्मचारियों को पुनः कार्य पर लगाया जाए।