रेजिडेंट डॉक्टर राकेश बिश्नोई की आत्महत्या के मामले में जोधपुर में शुक्रवार को रेजिडेंट डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार किया है। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं को इस बहिष्कार से मुक्त रखा गया है। कार्य बहिष्कार के कारण एसएन मेडिकल कॉलेज से जुड़े मथुरा दास माथुर अस्पताल, महात्मा गांधी अस्पताल और उम्मेद अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।
रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के सचिव डॉ. रंजीत चौधरी ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज में कुल 590 रेजिडेंट चिकित्सक कार्यरत हैं। डॉक्टरों ने दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाएं जुटाने में लगा हुआ है।
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बिश्नोई समाज ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
वहीं, दूसरी ओर गुरुवार को बिश्नोई समाज ने जोधपुर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है, तो बिश्नोई समाज आंदोलन को और तेज करेगा।
क्या है मामला?
एसएन मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग के तृतीय वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर राकेश बिश्नोई ने 13 जून को सुबह करीब 10:30 बजे सल्फास की गोलियां खा ली थीं। गंभीर हालत में उन्हें जयपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत से पहले डॉक्टर राकेश बिश्नोई का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने फार्माकोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजकुमार राठौड़ पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे।
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मोर्चरी के बाहर चल रहा धरना
14 जून को राकेश बिश्नोई की मौत के बाद जयपुर के एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना शुरू हुआ। इस धरने में आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल, विधायक अभिमन्यु पूनिया, युवा नेता निर्मल चौधरी और विक्रम सिंह बिश्नोई के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं।