गहलोत जी की बात को उनकी खुद की पार्टी गंभीरता से नहीं लेती। अब उनकी उम्र भी हो गई है, इसलिए क्या कहते हैं, इसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। वो केवल मीडिया में बने रहने के लिए बयान देते हैं। यह कहना है राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का जो आज जोधपुर प्रवास पर थे।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी बुधवार को जोधपुर दौरे पर रहे। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता की शोकसभा में सम्मिलित होकर शोक संवेदना व्यक्त की। इसके बाद वे सर्किट हाउस पहुंचे, जहां मीडिया से बातचीत में कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।
देवनानी ने आपातकाल के दौरान संविधान में जोड़े गए धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद जैसे शब्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि ये मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे। ऐसे में अब समय आ गया है कि आपातकालीन संशोधनों और शुरुआती कानूनों पर स्वास्थ्य विमर्श हो।
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा उन्हें सीएम पद की दौड़ में बताए जाने पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कह कि गहलोत जी की बात को उनकी खुद की पार्टी गंभीरता से नहीं लेती। अब उनकी उम्र भी हो गई है, इसलिए क्या कहते हैं, इसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। वो केवल मीडिया में बने रहने के लिए बयान देते हैं।
मीडिया और न्यायपालिका पर दबाव को लेकर गहलोत के बयान पर भी प्रतिक्रिया देते हुए देवनानी ने कहा कि हम केवल संविधान के दबाव में काम करते हैं, किसी अन्य के दबाव में नहीं। जो बार-बार कहते हैं कि संविधान खतरे में है, उनके नेता विदेशों में जाकर संविधान के विपरीत बयान कैसे दे सकते हैं?
वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान में साधारणतया विधानसभा के दो सत्र होते हैं लेकिन वो चाहते हैं कि राजस्थान में भी विधानसभा के तीन छात्र हो इसको लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से चर्चा भी की है। गुरु पूर्णिमा पर उन्होंने कहा कि मेरे लिए केवल भगवा ध्वज ही गुरु है।