राजस्थान की लोक-संस्कृति के लिए यह खबर गर्व और सम्मान से भरी हुई है। प्रदेश की दुर्लभ लोक वाद्य परंपरा भपंग को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले अलवर जिले के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार गफ़रू दीन मेवाती को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें कल गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।
अलवर अंचल की मेवाती संस्कृति से जुड़े गफ़रू दीन मेवाती ने अपना पूरा जीवन लोक संगीत और भपंग वादन की साधना में लगा दिया। भपंग, जो अपनी अनूठी ध्वनि और लय के लिए जाना जाता है, आज उनकी मेहनत और समर्पण के कारण देशभर में पहचाना जा रहा है। सीमित संसाधनों और संघर्षपूर्ण हालात के बावजूद उन्होंने इस लोक वाद्य को केवल गांवों और मेलों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि बड़े सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया।
गफ़रू दीन मेवाती ने राजस्थान के अलवर, जयपुर, खैरथल-तिजारा, सीकर, कोटपूतली-बहरोड़ और नागौर जिलों में विशेष ख्याति हासिल की है। इसके साथ ही मेवाड़ी और मारवाड़ी क्षेत्रों में भी उनके भपंग की गूंज लंबे समय से लोक संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय रही है। लोक मेलों, सांस्कृतिक आयोजनों और उत्सवों में उनकी प्रस्तुतियां आज भी दर्शकों को भाव-विभोर कर देती हैं।
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उन्होंने न केवल भपंग वादन को जीवित रखा, बल्कि युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने का भी निरंतर प्रयास किया। कई शिष्यों को प्रशिक्षण देकर उन्होंने इस लोक परंपरा को आगे बढ़ाया, जिससे यह कला विलुप्त होने से बच सकी।
पद्म पुरस्कार की घोषणा के बाद पूरे राजस्थान, विशेषकर अलवर और मेवात क्षेत्र में खुशी की लहर है। लोक कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों का मानना है कि यह सम्मान लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए ऐतिहासिक कदम है। गफ़रू दीन मेवाती का यह सम्मान वास्तव में राजस्थान की लोक आत्मा का राष्ट्रीय अभिनंदन है।