दीपावली के त्योहार से पहले नागौर जिला प्रशासन ने खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ी कार्रवाई की है। ‘शुद्ध आहार, मिलावट पर वार’ अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप अग्रवाल ने बुधवार को दो प्रतिष्ठानों पर छापामारी की, जिसमें घी और पतीसा के नमूने लिए गए तथा बड़ी मात्रा में सामग्री सीज की गई। यह कार्रवाई आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, जयपुर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नागौर, डॉ. जुगल किशोर सैनी के निर्देश पर की गई।
घी की गुणवत्ता पर संदेह, 60 लीटर सीज
पहली कार्रवाई मैसर्स पवन रिपेकर, बड़ली रोड, नागौर पर की गई। यहां से अधिकारी ने ‘मारवाड़ ब्रांड’ के घी का नमूना लिया, जो बाजार में बिक्री के लिए रखा गया था। जांच के दौरान घी की लेबलिंग और गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया पाया गया, जिसके बाद लगभग 60 लीटर घी तत्काल सीज कर लिया गया।
अधिकारी अग्रवाल ने बताया कि घी का नमूना प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है और यदि मिलावट की पुष्टि होती है तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान घी की मिलावट स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है, इसलिए उपभोक्ताओं को सावधान रहना चाहिए।
यह भी पढ़ें- राजस्थान बस अग्निकांड: हादसे के पीछे एक वजह ये भी- साधारण बस को एसी गाड़ी में किया था तब्दील; जले थे जिंदा लोग
2000 किलो पतीसा जब्त, लेबलिंग में गंभीर खामियां
दूसरी छापामारी मैसर्स श्री कृष्णा मावा भंडार, पीएचईडी सर्किल, नागौर पर की गई। यहां ‘गोपाल ब्रांड’ का पतीसा बीकानेर निर्माण इकाई का पाया गया, लेकिन पैकिंग पर निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और लॉट नंबर जैसी अनिवार्य जानकारी नहीं थी। FSSAI एक्ट का उल्लंघन स्पष्ट होने पर 2000 किलोग्राम पतीसा सीज किया गया और नमूने जांच के लिए भेजे गए। अधिकारी ने कहा कि ऐसी लेबलिंग में लापरवाही से शेल्फ लाइफ और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे उत्पाद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को सीधा खतरा पहुंचा सकते हैं।
अभियान पूरे जिले में जारी रहेगा
डॉ. जुगल किशोर सैनी ने कहा कि दीपावली खुशियों का त्योहार है, लेकिन मिलावटी मिठाइयां और घी लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि अभियान पूरे जिले में जारी रहेगा, जिसमें दुकानों, मिठाई भंडारों और खाद्य उत्पादन इकाइयों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे केवल FSSAI लाइसेंस प्राप्त उत्पाद ही खरीदें और संदिग्ध वस्तुओं की जानकारी हेल्पलाइन पर दें। नमूनों की लैब रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई से बाजार में शुद्धता और सतर्कता का संदेश गया है, लेकिन अभियान की वास्तविक सफलता जन जागरूकता पर निर्भर करेगी।
यह भी पढ़ें- राजस्थान बस कांड: घायलों से मिले गहलोत, मृतकों के परिजनों को दिलाया भरोसा; कहा- DNA जांच से ही सामने आएगा सच