देवली-उनियारा उपचुनाव 2024 के दौरान एसडीएम थप्पड़कांड के मुख्य आरोपी रहे निर्दलीय नेता नरेश मीणा मंगलवार को जेल से रिहा होने के बाद सीधे सीकर जिले के प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाकर अपने कृत्य पर अफसोस जताया और भविष्य में जनसेवा के लिए शक्ति देने की कामना की।
नरेश मीणा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “जो घटना घटित हुई थी वह दुर्भाग्यपूर्ण थी। उस समय की परिस्थितियों में मैं आवेश में आ गया और मुझसे गलती हो गई, जिसका आज मुझे बेहद अफसोस है।” उन्होंने कहा कि जेल से रिहाई के बाद सबसे पहले बाबा श्याम के चरणों में आने की इच्छा थी और उन्होंने बाबा से शक्ति मांगी है ताकि आगे जनता की भलाई के लिए और मजबूती से काम कर सकें।
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मंदिर में मीणा ने चांदी का निशान और छत्र अर्पित कर बाबा श्याम का आभार जताया। मंदिर कमेटी ने उनके परिवार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना करवाई। इसके बाद उन्होंने श्याम बगीची में संत शिरोमणि आलू सिंह महाराज के दर्शन भी किए। मीणा ने विश्वास जताया कि बाबा श्याम की कृपा से ही उन्हें जमानत मिली है और उन्होंने पूरे परिवार सहित बाबा के चरणों में कृतज्ञता प्रकट की। राजनीति में लंबे समय से सक्रिय नरेश मीणा ने कहा कि 20-25 साल के अनुभव के बावजूद अपेक्षित पद नहीं मिलने से वे मानसिक रूप से निराश थे, जिसका असर उनके व्यवहार पर पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे आत्ममंथन कर चुके हैं और आगे ऐसी कोई गलती दोहराई नहीं जाएगी।
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गौरतलब है कि 13 नवंबर 2024 को टोंक जिले के समरावता गांव में चुनाव प्रचार के दौरान एक विवाद में नरेश मीणा ने तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। इस घटना के बाद क्षेत्र में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की कई घटनाएं सामने आई थीं। प्रशासन ने हालात को देखते हुए मीणा को पहले एसडीएम से मारपीट मामले में और फिर समरावता हिंसा केस में गिरफ्तार किया था। नरेश मीणा की दो बार जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं। अंततः 11 जुलाई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी। जेल से बाहर आने के बाद उनका बाबा श्याम के दरबार में आना न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जा रहा है, बल्कि एक सार्वजनिक पश्चाताप के रूप में भी देखा जा रहा है।