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जनसंख्या दिवस पर विशेष : कॅरियर पहले, शादी बाद में...दो से अधिक बच्चे नहीं चाहते गोरखपुर के युवा

Sat, 11 Jul 2026 10:30 AM IST
Rohit Singh निखिल तिवारी, गोरखपुर
निखिल तिवारी, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Sat, 11 Jul 2026 10:30 AM IST
सार

रिश्तों और परिवार को लेकर भी नई पीढ़ी का नजरिया पहले से अधिक व्यावहारिक और संतुलित होता जा रहा है। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर हुए सर्वे में सामने आया कि अधिकांश युवा मानते हैं कि आज की पीढ़ी पहले की तुलना में देर से शादी करना पसंद कर रही है।

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Career first, marriage later... Gorakhpur's youth do not want more than two children.
अमर उजाला सर्वे में सामने आया लोगों का नजरिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदलती जीवनशैली, कॅरियर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आर्थिक चुनौतियों के बीच गोरखपुर के युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है। अब उनकी प्राथमिकता पहले कॅरियर बनाना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना है, जबकि शादी को वे जीवन के अगले पड़ाव के रूप में देख रहे हैं।

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अधिकांश युवा एक या दो बच्चों के परिवार को ही आदर्श मानते हैं, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे युवा भी हैं जिन्होंने अभी बच्चों को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
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रिश्तों और परिवार को लेकर भी नई पीढ़ी का नजरिया पहले से अधिक व्यावहारिक और संतुलित होता जा रहा है। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर हुए सर्वे में सामने आया कि अधिकांश युवा मानते हैं कि आज की पीढ़ी पहले की तुलना में देर से शादी करना पसंद कर रही है।
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उनका मानना है कि भावनात्मक समझ, आर्थिक स्थिरता और कॅरियर में मजबूती के बाद ही वैवाहिक जीवन की शुरुआत बेहतर होती है। यही वजह है कि शादी अब युवाओं की पहली प्राथमिकता नहीं रह गई है। महिलाओं के मातृत्व संबंधी फैसलों को लेकर भी युवाओं का मानना है कि शिक्षा, कॅरियर, आर्थिक आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत पसंद जैसे पहलुओं को आज पहले से अधिक महत्व दिया जा रहा है।

लिव इन को नहीं है समर्थन
सर्वे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर युवाओं की सोच पारंपरिक नजर आई। अधिकांश युवाओं ने लिव-इन रिलेशनशिप का समर्थन नहीं किया। हालांकि कुछ युवाओं ने इसे दो वयस्कों का व्यक्तिगत फैसला माना जबकि कुछ ने शादी से पहले एक विकल्प के रूप में स्वीकार किया।


परिवार के साथ बुजुर्गों की जिम्मेदारी
सर्वे में युवाओं ने बुजुर्गों की देखभाल को लेकर पारिवारिक जिम्मेदारी को सबसे अधिक महत्व दिया। 82.4 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि बुजुर्गों की देखभाल परिवार के साथ रहकर ही की जानी चाहिए। वहीं, कुछ युवाओं ने जरूरत पड़ने पर वृद्धाश्रम को विकल्प माना।

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