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एम्स के सात साल: इलाज के लिए भरोसा बढ़ा, बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ी- बुलंदियों पर गोरखपुर AIIMS

Sat, 11 Jul 2026 02:02 PM IST
Rohit Singh संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Sat, 11 Jul 2026 02:02 PM IST
सार

एम्स ने स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया है। संस्थान की कुल बेड क्षमता 578 से बढ़कर 632 हो गई है, जिससे अधिक मरीजों को भर्ती कर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। संस्थान में वर्तमान में 75 बेड का आईसीयू, 12 बेड का एडवांस्ड क्रिटिकल केयर यूनिट , 22 बेड का ट्रॉमा ट्रायेज, 35 बेड का आईपीडी वार्ड और छह बेड का ट्रॉमा आईसीयू संचालित है।

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Gorakhpur AIIMS completes seven years; trust in treatment grows, facilities expanded.
गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एम्स गोरखपुर शनिवार को अपना सातवां स्थापना दिवस मना रहा है। सात वर्षों में संस्थान पूर्वांचल का ही नहीं, बिहार और नेपाल के लाखों मरीजों के लिए उच्चस्तरीय इलाज का प्रमुख केंद्र बन गया है। इसके बावजूद मरीजों को सुविधाएं, जरूरत के मुताबिक बेड उपलब्ध कराना आज भी बड़ी चुनौती है।

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एम्स पर ओपीडी का अत्यधिक दबाव है। हर दिन 5000 मरीज आते हैं। इन सबके बीच सुपरस्पेशयलिटी विभाग की कमी खलती है। वर्तमान में एम्स में 166 पीजी (एमडी/एमएस) रेजिडेंट अध्ययनरत हैं। इसके अलावा आठ विषयों में डीएम (सुपर स्पेशियलिटी) के 18 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

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संस्थान में सात विषयों में पीडीएफ और चार विषयों में पीडीसीसी भी संचालित किए जा रहे हैं। स्नातक स्तर पर एमबीबीएस, बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग के पाठ्यक्रम संचालित हैं। वहीं, चार विषयों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैयार किए जा रहे हैं।

आने वाले वर्षों में चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ सुपर स्पेशियलिटी और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों का और विस्तार किया जाएगा, ताकि पूर्वांचल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके। एम्स के सात फैकल्टी सदस्यों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और चिकित्सा मंचों पर अपने शोध और अनुभव प्रस्तुत किए हैं। इससे संस्थान की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों को वैश्विक पहचान मिली है।

बेड क्षमता 632 हो गई, अभी और बढ़ाना होगा
एम्स ने स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया है। संस्थान की कुल बेड क्षमता 578 से बढ़कर 632 हो गई है, जिससे अधिक मरीजों को भर्ती कर बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

संस्थान में वर्तमान में 75 बेड का आईसीयू, 12 बेड का एडवांस्ड क्रिटिकल केयर यूनिट , 22 बेड का ट्रॉमा ट्रायेज, 35 बेड का आईपीडी वार्ड और छह बेड का ट्रॉमा आईसीयू संचालित है। इसके अलावा 15 बेड के निजी वार्ड भी शुरू किए जा चुके हैं। जल्द ही निजी वार्ड की संख्या 29 बेड तक बढ़ाने की योजना है।
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एम्स गोरखपुर की सात बड़ी उपलब्धियां
-
सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार : संस्थान में काॅर्डियोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, मेडिकल और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी समेत कई सुपर स्पेशियलिटी विभागों की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। हाल ही में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी आईपीडी वार्ड भी शुरू किया गया है।

- मरीजों का बढ़ा भरोसा : एम्स की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन करीब 5,000 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। आधुनिक जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता से मरीजों का भरोसा लगातार बढ़ा है।

- मेडिकल शिक्षा का विस्तार : एमबीबीएस, एमडी-एमएस, डीएम-एमसीएच, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रम संचालित हैं।
- शोध में राष्ट्रीय पहचान : संस्थान के चिकित्सकों ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध प्रकाशित किए हैं। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, मधुमेह, संक्रामक रोग और कैंसर सहित कई विषयों पर शोध को पहचान मिली है।

- आधुनिक सुविधाओं का विस्तार : डिजिटल एक्स-रे, अत्याधुनिक लैब, निजी वार्ड, आईसीयू विस्तार और नई जांच सुविधाएं शुरू की गई हैं। मरीजों की सुविधा के लिए एकीकृत सैंपल कलेक्शन सेंटर भी बनाया जा रहा है।

- डिजिटल हेल्थ में पहल : आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन, ऑनलाइन रिपोर्ट और डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

- पूर्वांचल का प्रमुख रेफरल सेंटर : गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन मंडल के साथ बिहार और नेपाल से आने वाले गंभीर मरीजों के इलाज का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

आगे की प्रमुख योजनाएं
-
रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत।
- कैथ लैब का संचालन।

- जेनेटिक लैब की स्थापना।
- सुपर स्पेशियलिटी विभागों का और विस्तार।

- मरीजों के लिए नई ओपीडी और जांच सुविधाएं।
- अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा।

- डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण विस्तार।

ओपीडी- पहले ढाई हजार तक होती थी। वर्तमान में लगभग 5,000 मरीज
कुल बेड- 750
सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं- 10 से अधिक

निजी वार्ड- 15 बेड
आईसीयू बेड- 75

ट्रॉमा सेवाएं- 200 बेड संचालित होने वाले हैं
कोर्स- एमबीबीएस, एमडी/एमएस, डीएम/एमसीएच, बीएससी एवं एमएससी नर्सिंग, पैरामेडिकल

एम्स में हुए जटिल ऑपरेशन
- 1.8 किलो का चेहरे का ट्यूमर : ईएनटी और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने 53 वर्षीय मरीज के चेहरे और गर्दन के पास से लगभग 1.8 किलो का विशाल ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की।
- 98 वर्षीय बुजुर्ग का सफल ऑपरेशन : ट्रॉमा विभाग ने एक अत्यंत जोखिम भरे मामले में 98 वर्षीय बुजुर्ग की सर्जरी की। सीढ़ियों से गिरने के कारण कूल्हे की हड्डी टूटने के अलावा वह मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा और हृदय रोग से भी पीड़ित थे।
- नाक में दांत उगने का दुर्लभ मामला : दंत रोग विभाग के डॉक्टरों ने दो साल के बच्चे की नाक में उगे दांत को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला। यह समस्या क्लेफ्ट लिप (कटे होंठ) से जुड़ी हुई थी।

- 10 साल बाद खुला किशोरी का मुंह : 12 साल की बच्ची, जिसका मुंह 10 साल से बंद था (वह केवल तरल पदार्थों पर निर्भर थी), का डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया।

- जटिल फेफड़े का ऑपरेशन : डॉक्टरों ने छह वर्षीय बच्चे के फेफड़े की गंभीर बीमारी (जिसमें फेफड़े पर मोटी परत जम गई थी) का सफल ऑपरेशन किया।
- विल्स्स ट्यूमर का सफल ऑपरेशन : एक वर्षीय बच्ची के जटिल किडनी के कैंसर विल्म्स ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया है। संस्थान में किडनी के कैंसर (विल्म्स ट्यूमर) से पीड़ित देवरिया निवासी एक वर्षीय बच्ची का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। सर्जरी के बाद बच्ची अब स्वस्थ है।

 
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