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Gorakhpur News: एम्स में पहली बार छाती व फेफड़े की जटिल सर्जरी, छह साल के मासूम को मिला नया जीवन

संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Wed, 20 May 2026 02:36 AM IST
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Success of 'Thoracotomy and Decortication' surgery will end dependence on Delhi and Lucknow
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गोरखपुर। एम्स ने एक छह वर्षीय बच्चे के छाती और फेपड़े की जटिल सर्जरी ''''''''थोराकोटॉमी और डिकॉर्टिकेशन'''''''' को सफलतापूर्वक कर बड़ी सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि के बाद अब पूर्वांचल और बिहार के बच्चों को जटिल ऑपरेशनों के लिए दिल्ली या लखनऊ की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।

देवरिया का रहने वाला मासूम अनमोल लंबे समय से तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रहा था। परिजनों ने पहले उसे निजी अस्पताल में दिखाया, जहां उसके सीने में ड्रेनेज ट्यूब डाली गई। टीबी की आशंका में इलाज शुरू किया गया। इसके बावजूद बच्चे की हालत बिगड़ती गई, अंतत: उसे एम्स गोरखपुर लाया गया।
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जांच में नहीं हुई टीबी की पुष्टि, गंभीर बीमारी का पता चला

एम्स में बाल रोग विभाग की प्रो. डॉ. ममता गुप्ता के नेतृत्व में बच्चे की जांच की गई। रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि नहीं हुई। सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड से पता चला कि बच्चे के बाएं फेफड़े पर संक्रमण की एक मोटी परत जम गई थी। इस कारण फेफड़ा पूरी तरह सिकुड़ गया था और सांस लेना दूभर हो गया था। साथ ही उसे ब्रोंको-प्लूरल फिस्टुला जैसी गंभीर जटिलता भी थी, इसके कारण बच्चे की श्वांस नली पूरी तरह से जाम हो गई थी।
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मैराथन सर्जरी और टीम की सफलता

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. श्रेयंस और उनकी टीम ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया थोराकोटॉमी से सीना खोलकर प्रभावित हिस्से तक पहुंच बनाई। साथ ही फेफड़े पर जमी संक्रमित परत को हटाने के लिए डिकॉर्टिकेशन सर्जरी की। इससे टीम को फेफड़े के रिसाव को ठीक करने में सफलता मिली। इस जटिल प्रक्रिया के बाद संक्रमित परत हटते ही फेफड़ा दोबारा फैलने लगा। सर्जरी के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।



पूर्वांचल के लिए वरदान, टीम को बधाई
कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने इस सफलता पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों के लिए राहत की खबर है। अब हमारे यहां पीडियाट्रिक सर्जरी की विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे गरीब मरीजों को बड़े शहरों में जाने के आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी।
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