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Gorakhpur News: शबरी के विश्वास और प्रतीक्षा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर
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चंपा देवी पार्क में चल रहे श्री राम कथा में उपस्थित लोग । संवाद
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चंपा देवी पार्क में राजन महाराज सुना रहे रामकथा, समापन आज
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। चंपा देवी पार्क में आयोजित रामकथा के आठवें दिन मंगलवार को कथावाचक राजन महाराज ने भरत के चरित्र और शबरी की निष्कलंक भक्ति का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में भरत के त्याग, प्रेम, धैर्य और शबरी के विश्वास व प्रतीक्षा के प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
राजन महाराज ने कहा कि भरत की ओर से राज्य स्वीकार करने के बजाय प्रभु राम की चरण पादुकाओं को सिर पर धारण कर अयोध्या लाकर शासन संचालन की शपथ लेना अनुपम त्याग का उदाहरण है। यह चरित्र भाई-भाई के प्रेम, समर्पण और कर्तव्य भावना की प्रेरणा देता है।
उन्होंने भरत को अयोध्या कुल का दीपक बताते हुए कहा कि सच्चे विश्वास और प्रतीक्षा से भगवान को भी भक्त के पास आना पड़ता है। राजन महाराज ने मातंग ऋषि के वचनों पर अडिग विश्वास रखते हुए प्रभु राम की प्रतीक्षा करने वाली शबरी के प्रेम, आंसुओं से चरण पखारने और कंद-मूल फल अर्पण के दृश्य का करुण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि शबरी भक्ति और ईश्वर पर अटूट विश्वास की अप्रतिम मिसाल हैं। प्रभु राम की ओर से शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश यह दर्शाता है कि भगवान को केवल निस्वार्थ भक्ति ही प्रिय है। ‘सीताराम चरण रति मोरे’, ‘रामा-रामा रटते-रटते’ और ‘शबरी सवारी रास्ता आएंगे रामजी’ जैसे भजनों से कथास्थल भक्ति भाव से सराबोर रहा।
कथा में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला समेत कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य अतिथि, आयोजन समिति के सदस्य और हजारों श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। चंपा देवी पार्क में आयोजित रामकथा के आठवें दिन मंगलवार को कथावाचक राजन महाराज ने भरत के चरित्र और शबरी की निष्कलंक भक्ति का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में भरत के त्याग, प्रेम, धैर्य और शबरी के विश्वास व प्रतीक्षा के प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
राजन महाराज ने कहा कि भरत की ओर से राज्य स्वीकार करने के बजाय प्रभु राम की चरण पादुकाओं को सिर पर धारण कर अयोध्या लाकर शासन संचालन की शपथ लेना अनुपम त्याग का उदाहरण है। यह चरित्र भाई-भाई के प्रेम, समर्पण और कर्तव्य भावना की प्रेरणा देता है।
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उन्होंने भरत को अयोध्या कुल का दीपक बताते हुए कहा कि सच्चे विश्वास और प्रतीक्षा से भगवान को भी भक्त के पास आना पड़ता है। राजन महाराज ने मातंग ऋषि के वचनों पर अडिग विश्वास रखते हुए प्रभु राम की प्रतीक्षा करने वाली शबरी के प्रेम, आंसुओं से चरण पखारने और कंद-मूल फल अर्पण के दृश्य का करुण वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि शबरी भक्ति और ईश्वर पर अटूट विश्वास की अप्रतिम मिसाल हैं। प्रभु राम की ओर से शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश यह दर्शाता है कि भगवान को केवल निस्वार्थ भक्ति ही प्रिय है। ‘सीताराम चरण रति मोरे’, ‘रामा-रामा रटते-रटते’ और ‘शबरी सवारी रास्ता आएंगे रामजी’ जैसे भजनों से कथास्थल भक्ति भाव से सराबोर रहा।
कथा में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला समेत कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य अतिथि, आयोजन समिति के सदस्य और हजारों श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।