UP News: यूपी में भूजल को मिली नई जिंदगी, सात साल में आधे रह गए 'डेंजर जोन' वाले विकासखंड; पढ़ें अपडेट
यूपी में भूजल स्तर सुधर रहा है। अतिदोहित विकासखंड 82 से घटकर 44 ही रह गए हैं। जल संरक्षण अभियानों का असर दिख रहा है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर 0.5 से 2 मीटर तक बढ़ गया है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चेकडैम और अमृत सरोवर से भूजल रिचार्ज को मजबूती मिली है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियानों का असर अब भूजल स्तर पर भी दिखने लगा है। वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में 82 विकासखंड अति दोहित (ओवर एक्सप्लॉइटेड) श्रेणी में थे, उनकी संख्या घटकर 44 रह गई है। वहीं सुरक्षित श्रेणी के विकासखंडों की संख्या 540 से बढ़कर 563 हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में पेयजल संकट कम करने और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति के मुताबिक वर्षा जल संचयन, चेकडैम, अमृत सरोवर और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन जैसे प्रयासों से प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज बढ़ा है।
35,206 भवनों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित
अटल भूजल योजना के तहत कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में 550 ग्राम पंचायतों में से 303 पंचायतों में भूजल स्तर 0.5 से 2 मीटर तक सुधरने की पुष्टि हुई है। सरकार ने रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी बढ़ावा दिया है। प्रदेश में 1.05 लाख से अधिक उपयुक्त भवनों की पहचान की गई, जिनमें से 35,206 भवनों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की जा चुकी है।
गर्मी के मौसम में जल संकट की आशंका भी कम
इसके अलावा लघु सिंचाई विभाग ने 6,627 चेक डैम, ग्राम्य विकास विभाग ने करीब 19,974 अमृत सरोवर और कृषि विभाग ने 37,273 खेत तालाब विकसित किए हैं। भूजल स्तर में सुधार का सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। इससे हैंडपंप और नलकूपों में पानी की उपलब्धता बेहतर होगी, सिंचाई की लागत घटेगी और गर्मी के मौसम में जल संकट की आशंका भी कम होगी।