गोरखपुर शहर के एक डॉक्टर अगस्त माह में पॉजिटिव हुए थे। 10 से 15 दिनों के अंदर वह ठीक हो गए। इसके बाद वह अक्तूबर माह में फिर से संक्रमित हो गए। इस बीच उन्होंने एंटीबॉडी की जांच कराई तो पता चला कि उनके अंदर एंटीबॉडी बनी ही नहीं। ऐसे में उन्हें 20 से 25 दिन हो गए ठीक होने में। दूसरी बार संक्रमण के दौरान उन्हें कमजोरी और हाथों में झनझनाहट की शिकायत होने लगी।
दोबारा संक्रमण होने पर ज्यादा दर्द दे रहा कोरोना, सामने आ चुके हैं कई केस
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वहीं शहर के बिछिया कॉलोनी के रहने वाले एक कर्मचारी अक्तूबर माह में दूसरी बार संक्रमण का शिकार हो गए। इसके बाद उनकी समस्याएं और बढ़ गई। उन्हें कमजोरी, शरीर में दर्द की शिकायत के साथ-साथ खाना न अच्छा लगने की समस्या होने लगी। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी सांस लेने में परेशानी जारी रहा। अंत में ठीक होने के बाद भी डॉक्टर से सलाह लेकर दवा शुरू किया।
ये दो केस तो महज बानगी है। ऐसे 20 से अधिक मामले शहर में अब तक आ चुके हैं, जो कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। दूसरी बार संक्रमण उन्हें ज्यादा दर्द दे रहा है। हाथों में झनझनाहट के साथ कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ रही है। ऐसे में विशेषज्ञ भी इन लक्षणों और वायरस के बदलाव से चिंतित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर स्पष्ट रूप से कुछ कह पाना संभव नहीं है। क्योंकि अब तक कई तरह के मरीज सामने आ चुके हैं। सभी मरीजों पर वायरस का असर अलग-अलग तरीकों से रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि ऐसे मरीजों के आंकड़े इकट्ठा किए जा रहे हैं। दो मरीजों पर बकायदा शोध करके उसके रिसर्च पेपर जनरल में प्रकाशित करने के लिए भी अमेरिका भेज दिए गए हैं। यह दोनों मामले इसी तरह से थे।
वायरस को कमजोर आंकना गलत
डॉ. अमरेश सिंह ने कहा कि वायरस को कमजोर आंकना गलत होगा। जब तक पूरी तरह से वायरस पर शोध न हो जाए, कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि वायरस की संरचना में लगातार बदलाव हो रहे हैं। मरीजों की स्थिति बता रही है कि वायरस कब किस पर कौन से असर डाल दें, यह कोई भी बता नहीं सकता है। इतना जरूर है कि गंभीर मरीज वायरस से बच कर रहे। वरना उनके लिए यह ज्यादा घातक हो सकता है।