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बाढ़ पीड़ितों का दर्द: एक समय भोजन कर वक्त गुजार रहे लोग, बोले- बच्चे जब मांगते हैं रोटी तो जान की कीमत हो जाती है कम
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 02 Sep 2021 03:53 PM IST
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर शहर से सटे हर्बर्ट बंधे के किनारे बसे बहरामपुर गांव के लोग किसी तरह एक वक्त का भोजन कर खुद को जिंदा रखने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। वैसे तो उनके लिए राप्ती नदी का पानी बढ़ना-घटना सामान्य बात है, लेकिन इस साल हालात जुदा हैं। हर घंटे बढ़ रहा नदी का पानी खेत-खलिहान को भरता हुआ आंगन और रसोई तक पहुंच गया है। रास्तों पर पांच से छह फुट पानी है। जिनका घर पक्का है वे छत पर शरण लिए हैं, लेकिन टिनशेड वालों को बांध पर शरण लेनी पड़ी है। राप्ती नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। नदी खतरे के निशान को पार करते हुए बांध के बराबर की ऊंचाई पर बह रही है। राजघाट पुल पर नदी का पानी पिलर के उच्चतम छोर से थोड़ा नीचे है। नदी की तलहटी के स्तर पर बसे बहरामपुर गांव के लोगों के लिए यह पानी बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। नदी के जलस्तर के घटने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में जिनके घरों में पानी भरा है, उनकी मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
राजघाट पुल से लेकर डोमिनगढ़ तक हर्बर्ट बांध से लगी नदी की तरफ बसे घरों में पानी भर गया है। बाले मियां के मैदान के पास हर्बर्ट बांध पर बैठे लोगों का कहना था कि नदी का पानी जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखकर डर लगने लगा है। बांध के किनारे तमाम लोग प्लास्टिक तानकर अपना सामान सुरक्षित रखने में जुटे थे। लोगों का कहना था कि बाढ़ के साथ तेज धूप व बारिश तकलीफ बढ़ा रही है। ऐसे में किसी तरह से सामान सुरक्षित रखने के साथ सिर छिपाने के लिए जगह जरूरी है। अभी प्रशासन की तरफ से इस इलाके में कोई राहत कैंप नहीं बनाया गया है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
कहीं नहीं मिला मेडिकल कैंप
बाढ़ प्रभावित इलाके में लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्रशासन की तरफ से मेडिकल टीम लगाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन बहरामपुर गांव के लोग अब तक ऐसी किसी मेडिकल टीम के क्षेत्र में नहीं आने की बात कहते हैं। बंधे पर मौजूद लोगों का कहना था कि प्रशासन की ओर से केवल दो नावें मिली हैं, जिससे किसी तरह गुजारा किया जा रहा है। इसके अलावा एक दिन कोटेदार के यहां से राशन वितरण हुआ था। इसके अलावा कोई सुविधा नहीं मिली।
बाढ़ प्रभावित इलाके में लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्रशासन की तरफ से मेडिकल टीम लगाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन बहरामपुर गांव के लोग अब तक ऐसी किसी मेडिकल टीम के क्षेत्र में नहीं आने की बात कहते हैं। बंधे पर मौजूद लोगों का कहना था कि प्रशासन की ओर से केवल दो नावें मिली हैं, जिससे किसी तरह गुजारा किया जा रहा है। इसके अलावा एक दिन कोटेदार के यहां से राशन वितरण हुआ था। इसके अलावा कोई सुविधा नहीं मिली।
मैना देवी।
- फोटो : अमर उजाला।
बढ़ता जा रहा है बाढ़ पीड़ितों का दर्द
बहरामपुर बाढ़ पीड़ित मैना देवी ने बताया कि घर में बच्चे और बुजुर्ग हैं। घर में तीन से चार फुट तक पानी भरा है। सभी छत पर रह रहे हैं। एक सप्ताह से नाव से बांध तक आकर भोजन-पानी की व्यवस्था कर रही हूं। एक बार में जितना भोजन-पानी जा पाता है, उसी से अगले 24 घंटे तक का वक्त काटना पड़ता है। ऐसे में जब बच्चे दोबारा रोटी मांगते हैं तो जान की कीमत कम लगने लगती है।
बहरामपुर बाढ़ पीड़ित मैना देवी ने बताया कि घर में बच्चे और बुजुर्ग हैं। घर में तीन से चार फुट तक पानी भरा है। सभी छत पर रह रहे हैं। एक सप्ताह से नाव से बांध तक आकर भोजन-पानी की व्यवस्था कर रही हूं। एक बार में जितना भोजन-पानी जा पाता है, उसी से अगले 24 घंटे तक का वक्त काटना पड़ता है। ऐसे में जब बच्चे दोबारा रोटी मांगते हैं तो जान की कीमत कम लगने लगती है।
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छटंकी
- फोटो : अमर उजाला।
इस बार हालात डराने वाले
बहरामपुर बाढ़ पीड़ित छटंकी ने बताया कि नदी का पानी तो हर साल बरसात में चढ़ता है, लेकिन इस बार हालात डराने वाले हैं। घर में कमर तक पानी है। ऐसे में भोजन-पानी, दवाओं आदि का संकट गहरा गया है। किसी तरह से एक वक्त का भोजन मिल रहा है। प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली।
बहरामपुर बाढ़ पीड़ित छटंकी ने बताया कि नदी का पानी तो हर साल बरसात में चढ़ता है, लेकिन इस बार हालात डराने वाले हैं। घर में कमर तक पानी है। ऐसे में भोजन-पानी, दवाओं आदि का संकट गहरा गया है। किसी तरह से एक वक्त का भोजन मिल रहा है। प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली।

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