राजधानी लखनऊ में पकड़े गए पीएफआई के दोनों सदस्य अपने संगठन के लोगों को आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित करने का सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे थे। ये जानकारी एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने दी।
उन्होंने बताया कि एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, यह तलाश देश के कई शहरों में हो रही थी। इन्हीं ठिकानों परये अपने द्वारा बनाए गए हिट स्क्वायड के युवकों को प्रशिक्षण देने वाले थे।
अपने नेटवर्क को फैलाने के लिए दोनों ने कई जिलों का दौरा भी किया था। वहां कुछ सुनसान इलाकों में जमीन व मकान की तलाश कर ली थी। जिसकी जानकारी एसटीएफ जुटा रही है।
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फाइल फोटो।
- फोटो : सोशल मीडिया
निशाने पर मेट्रो! मिला कार्ड
दोनों के पास से मेट्रो कार्ड मिला है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि उनके निशाने पर मेट्रो में सफर करने वाले लोग थे। मेट्रो में किस समय भीड़ होती है। किस समय खाली रहता है। इसकी भी रेकी की बात सामने आई है। एसटीएफ पता लगा रही है कि इन्होंने लखनऊ में रहने के दौरान कितनी बार मेट्रो का सफर किया।
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आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद एडीजी ने प्रेस काफ्रेंस की।
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स्क्वायड को अंडरग्राउंड रहने का निर्देश
दोनों ने कुबूल किया कि हिट स्क्वायड के सदस्यों अंडरग्राउंड रहने का निर्देश दिया गया था ताकि वे किसी की नजर में न आएं। उनको साफ निर्देश दिया गया है कि किसी भी धार्मिक समारोह, आंदोलन या प्रदर्शन में शामिल न हों, जिससे कि पुलिस उनको निशाने पर लेकर पूछताछ न कर सके। इससे उनका नेटवर्क प्रभावित होता।
एसटीएफ की गिरफ्त में आए (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) पीएफआई के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपना अंडरग्राउंड नेटवर्क तैयार कर लिया है। इन लोगों ने अक्षय कुमार की एक फिल्म की तर्ज पर ऐसे ‘हिट स्क्वायड’ बना रखें हैं जो एक इशारे पर किसी भी आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। ऐसे लोगों को गोपनीय तरीके से ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इन्हीं के सहारे पूरे देश में आतंक फैलाने की साजिश रची गई थी। एसटीएफ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दोनों ने पूछताछ में ये राज उगले हैं। ये पूर्व में पकड़े गए रऊफ के काफी करीबी हैं। संभवत: उसी के इशारे पर बंगाल, बिहार, राजस्थान, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र में अपना नेटवर्क काफी तेजी से फैला रहे थे।