आगरा में अपहरण के बाद इकलौते बेटे सचिन चौहान की हत्या से उसके माता-पिता सदमे में हैं। मृतक के पिता कोल्ड स्टोरेज मालिक सुरेश चौहान ने बताया कि बेटा सचिन और हर्ष हमेशा साथ-साथ रहते थे। घर से कोल्ड स्टोरेज जाने से लेकर बैंक और बाजार से खरीदारी तक एक साथ करते थे। मैं भी हर्ष को बेटे से बढ़कर मानता था। उसके पिता लेखराज से भाई जैसे संबंध हैं। 35 साल से कभी दोस्ती में दरार नहीं आई। सपने भी नहीं सोचा था कि जिसे बेटे से बढ़कर माना, वही उनके घर का चिराग बुझा देगा। यह कहते हुए सुरेश चौहान की आंखों से आंसू बहने लगते हैं। रिश्तेदार उन्हें किसी तरह संभालते हैं। उधर, बेटे का आखिरी बार चेहरा भी नहीं देख पाने से मां अनीता सदमे में हैं। उन्हें परिवार की महिलाएं संभाल रही हैं।
आगरा सचिन हत्याकांड: जिसे बेटे से बढ़कर माना, उसी ने बुझा दिया घर का चिराग, सदमे में मां-बाप
मूलरूप से बरहन क्षेत्र के गांव रूपधनु निवासी सुरेश चौहान का गांव में ही एसएस आइस एंड कोल्ड के नाम से कोल्ड स्टोरेज है। वह आगरा और हाथरस में जिला पंचायत की ठेकेदारी भी करते हैं। सुरेश चौहान ने बताया कि उनकी गांव के ही लेखराज सिंह से 40 साल पुरानी दोस्ती है। वह उसे दोस्त कम छोटा भाई ज्यादा मानते थे। दोनों ने एक साथ काम शुरू किया। वह दोनों ठेकेदारी भी साथ करते हैं। परिवार में दोनों एक-दूसरे का साथ देते हैं। हर्ष सचिन से दो साल छोटा था। मगर, वह उसे भी बेटे की तरह मानते थे। किसी ने सोचा भी नहीं था। हर्ष भी इस साजिश में शामिल होगा, जबकि वह सचिन को तलाशने में परिवार के साथ दिन रात एक किए था।
सुरेश चौहान के अनुसार 21 जून को जब सचिन लापता हुआ, तब अनहोनी की आशंका पर लेखराज ने अपने एक रिश्तेदार की मदद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय से मामले में सिफारिश लगाई थी। 23 जून को केस में एसटीएफ ने जांच शुरू कर दी। इसके बाद भी हर्ष पुलिस की मदद कर रहा था। सुरेश चौहान से रोजाना सचिन के बारे में पूछता था। जब एसटीएफ ने हर्ष को गिरफ्तार किया तो सुरेश के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि वह ऐसा कर कर देगा।
मां बोली, बेटे का आखिरी बार चेहरा तक नहीं देखने दिया...
इकलौते बेटे की मौत से मां अनीता रो-रोकर बेसुध हो गईं। होश आया तो बेटे को देखने के लिए कहने लगी। उन्होंने बताया कि 21 जून को बेटा सो रहा था। फोन आया और बाहर निकल गया। उन्हें कुछ बताया भी नहीं। फिर कई बार फोन मिलाए, लेकिन रिसीव नहीं हुए। रात में 11 बजे के बाद फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि सचिन की तबीयत खराब है। वह नोएडा में है। बात नहीं कर सकता है। सुबह आ जाएगा। इसके बाद फोन स्विच ऑफ हो गया। छह दिन बाद उसकी मौत की खबर आई। उसकी लाश तक को जला दिया गया। वह आखिरी बार बेटे का चेहरा तक नहीं देख सकीं। सचिन की एक छोटी बहन भी है। वह भाई की मौत से बेसुध हो गई।
21 जून को लापता हुए सचिन चौहान की हत्या उसके दोस्तों ने की थी। सचिन को उसके दोस्तों ने पहले अगवा किया, फिर हत्या कर दी। इसके बाद पीपीई किट पहनकर उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया। उसकी अस्थियां तक विसर्जित कर दी। पूरी वारदात में सुरेश चौहान के साझीदार लेखराज सिंह का बेटा हर्ष और चीन से वापस आया कारोबारी सुमित असवानी शामिल था। पुलिस ने दोनों दोस्तों के साथ ही पांच और आरोपियों को गिरफ्तार कर सोमवार को इस हत्याकांड का खुलासा किया।