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मथुरा: शीतलता प्रदान करने वाले फूलों की छांव में विराजेंगे ठाकुर बांकेबिहारी, सुबह शाम देंगे भक्तों को दर्शन

Sat, 09 Apr 2022 02:51 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, वृंदावन(मथुरा)
संवाद न्यूज एजेंसी, वृंदावन(मथुरा) Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 09 Apr 2022 02:51 PM IST
सार

गर्मी के मौसम में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए फूल बंगले सजेंगे।

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banke bihari ji will sit at phool bangla from ekadashi mathura news
प्रदर्शनी में बांकेबिहारी का दरबार - फोटो : अमर उजाला
गर्मी का अहसास होते ही ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने की प्राचीन परंपरा का 12 अप्रैल से निर्वहन होगा। बांकेबिहारी मंदिर में कामदा (फूलडोल) एकादशी से जन जन के आराध्य ठाकुर जी प्रतिदिन सुबह और शाम सुगंधित फूलों से बने बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। मंगलवार को कामदा एकादशी से प्रारंभ होने वाले फूल बंगला सजाने का क्रम 28 जुलाई श्रावण मास की हरियाली अमावस्या तक जारी रहेगा। इसके साथ ही वृंदावन के ठाकुर राधा वल्लभलाल, राधास्नेह बिहारी, राधारमण मंदिर, राधा दामोदर, राधा श्याम सुंदर सहित अन्य मंदिरों में फूल बंगले सजाने का क्रम कामदा एकादशी से प्रारंभ होगा। बांके बिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि आराध्य को शीतलता प्रदान करने के लिए फूल बंगले सजाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि कामदा एकादशी से फूल बंगले सजाने का क्रम शुरू होगा और हरियाली अमावस्या तक चलेगा।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

बांके बिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि फूल बंगला निर्माण में गेंदा, गुलाब, कमल, रजनीगंधा, रायबेल, कुंद, मोगरा, चमेली, मौलश्री आदि फूलों का प्रयोग होता है। बता दें वृंदावन के समीपवर्ती लक्ष्मीनगर, राजपुर, सुनरख, अहिल्यागंज, तेहरा आदि गांवों के ग्रामीणों के लिए फूल बंगला निर्माण आमदनी और रोजी रोटी का जरिया है। यह लोग फूलों का उत्पादन कर फूल बंगला बनाते भी हैं। फूल बंगला निर्माण में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में फूलों का प्रयोग होता है। इस विधा में लगे कारीगरों को भी इसका लाभ मिलता है। 

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रथ पर सवार होकर निकले ठाकुर बांकेबिहारी महाराज - फोटो : अमर उजाला

ठाकुर बांकेबिहारीलाल के प्राकट्यकर्ता संगीत सम्राट स्वामी हरिदास ने आराध्य के फूलबंगले की सेवा की शुरूआत की थी। स्वामीजी निधिवन राज मंदिर में गर्मी के दिनों में नित आराध्य को फूलबंगले में विराजित करते थे। ठाकुरजी की राग सेवा करते हुए स्वामीजी की भावना थी कि गर्मी के दिनों में फूल और पत्तियों से बने डोले में विराजे ठाकुरजी को शीतलता मिलती है। 

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बांकेबिहारी मंदिर में स्वर्ण रजत हिंडोला - फोटो : अमर उजाला

भाव सेवा के अनुररूप आराध्य को फूल और पत्तियों से बने डोले में बिठाते और सेवा करते थे। परंपरा का निर्वहन करते हुए बांकेबिहारीजी के सेवायतों ने भी गर्मी के दिनों में फूलबंगला परंपरा बरकरार रखी। शुरूआती दौर में साधारण दिखने वाले फूल बंगला में रायबेल और चमेली के फूलों का ही अधिक इस्तेमाल होता था लेकिन वर्तमान में देशी विदेशी फूलों का भी इस्तेमाल बंगला बनाने में किया जाता है।

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बांकेबिहारी महाराज के लिए सजाई गई सुखसेज - फोटो : अमर उजाला

बता दें विगत सैकड़ों वर्षों से चैत्र की एकादशी से गर्भगृह से बाहर आकर  बांकेबिहारीजी दर्शन देते रहे हैं। इस दिन से भक्त आनंदित होकर उनके दर्शन चंदन चबूतरा पर करते हैं। एकादशी से उनका सिंहासन चंदन चबूतरा पर रखा जाता है। उसके चारों और भव्य फूलबंगला सजाया जाता है। इतना ही नहीं ठाकुर जी की पोशाक में भी भक्तगणों द्वारा फूलों तक का प्रयोग किया जाता है। 

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