बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं: मनोना उपकेंद्र को बना दिया 'भैंसों का तबेला', पांच हजार लोग इलाज के लिए भटकने को मजबूर
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मनोना गांव के प्रबल प्रताप, अरुण कुमार, सुभाष चौहान, हरेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2015 में निर्माण के बाद स्वास्थ्य उपकेंद्र में कोई चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी नहीं आया। ऐसे में भवन खंडहर हो चुका है। खाली पड़े केंद्र के कमरों में अब ग्रामीणों ने पशुओं को बांधना शुरू कर दिया है। यहां किसी कमरे में भूसा भरा है तो कहीं पर उपले रखे गए हैं।
इन गांवों को मिलता इलाज
मनोना स्वास्थ्य उपकेंद्र से मनोना, सियपुरा, शाहपुर खालसा, सेरव, नया बास, मल्ल का पुरा आदि गांव जुड़े हुए हैं। इन गांवों में करीब 5000 लोगों की आबादी है। स्वास्थ्य उपकेंद्र पर सुविधा नहीं होने से अभी उन्हें सामान्य बीमारियों के उपचार के लिए सीएचसी पिनाहट जाना पड़ता है। सीएचसी पिनाहट की दूरी इन गांवों से 12 किलोमीटर तक पड़ती है।
ग्रामीणों का दर्द
इलाज कराने जाते हैं 12 किलोमीटर दूर
मनोना गांव में बना स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद पड़े होने के कारण गांव के बीमारों को इलाज में परेशानी झेलनी पड़ती है। किसी को सर्दी-जुकाम होने पर भी 12 किलोमीटर दूर सीएचसी पिनाहट लेकर जाना पड़ता है। -कालू शर्मा, सियापुरा
अफसरों की अनदेखी भुगत रहे हैं ग्रामीण
गांव में छह साल पहले बना अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अनदेखी से एक भी दिन चल नहीं सका है। पूरी बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। कई बार शिकायत की गई। इसके बाद भी अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिखा। -गिर्राज, मल्ल का पुरा
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