फिरोजाबाद में डेंगू अब बच्चों से ज्यादा बड़ों को भी अपना शिकार बना रहा है। सरकारी ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी में भर्ती करने के लिए जगह नहीं बची है। मरीजों को बेंच, स्ट्रेचर आदि पर लेटकर इलाज करना पड़ रहा है। बुखार से तपते नए मरीजों को पहले जमीन पर लेटकर घंटों पलंग खाली होने का इंतजार करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज का वार्ड नंबर चार और पांच भी फुल है। शुक्रवार को इमरजेंसी में क्षमता से कई गुना ज्यादा मरीज भर्ती थे। यहां तक की तीमारदारों को बैठने तक के लिए जगह नहीं बचीं थी। वार्ड में पड़े पलंग पर दो-दो मरीज भर्ती थे। पलंग के बीच स्ट्रेचर या बेंच डालकर भी मरीजों को भर्ती किया गया। इसके बाद भी मरीज आते रहे तो बरामदे में पड़ी स्लेप पर लेटाकर ही ड्रिप चढ़ाई गई। स्टोर और अन्य कक्षों में भी अतिरिक्त पलंग डलवाए गए हैं।
दम तोड़तीं व्यवस्थाएं: इमरजेंसी में भर्ती के लिए नहीं जगह, बेंच-स्ट्रेचर पर इलाज, सिस्टम को आईना दिखातीं फिरोजाबाद की ये तस्वीरें
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डेंगू और वायरल बुखार से सुहागनगरी में कहर बनकर टूटा। अब बच्चों को निमोनिया और डायरिया ने जकड़ना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को सौ शैय्या अस्पताल की ओपीडी में बाल रोगियों और तीमारदारों की लंबी लाइनें लगीं रहीं। सौ शैय्या अस्पताल में डेंगू, वायरल के साथ डायरिया और निमोनिया से पीड़ित 290 बच्चे भर्ती हैं। शुक्रवार को ही 153 मरीज भर्ती किए गए हैं। प्राइवेट चिकित्सकों के क्लीनिकों पर भी भीड़ लग रही है। लोग क्लीनिकों पर नंबर लगाने के लिए सुबह पांच बजे से खड़े हो गए।
सौ शैय्या अस्पताल में ओपीडी से लेकर रक्त सैंपल लेने और दवा के लिए लंबी कतारें देखने को मिली। दोपहर तक 280 से ज्यादा मरीज ओपीडी में देखे गए। डेंगू और वायरल बुखार से पीड़ित मरीज आए ही। साथ ही डायरिया और निमोनिया भी बच्चों को अब घेर रहा है। ज्यादा गंभीर अवस्था वाले मरीजों को सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती किया। भीड़ अधिक होने के कारण मरीज और तीमारदारों को भी परेशानी हुई। डेंगू के मरीज भी लगातार मिल रहे हैं।