जर्मनी व अमेरिका की तकनीकी से यमुना एक्सप्रेसवे लोगों की सहूलियत के लिए बनाया गया था। इस पर चलने के लिए नियम कायदे भी तय हैं लेकिन वाहन चालक इसका पालन नहीं करते हैं। यही कारण रहा कि शुक्रवार सुबह बस चालक ने एक कार को रौंद दिया। इसमें चालक एक नहीं तीन लापरवाही बरत रहा था। नींद, तेज रफ्तार व ओवरटेक की लेन में बस चलाना ही हादसे का कारण बना। यदि बस में सवारियां होतीं तो कई की जानें चली जातीं। यमुना एक्सप्रेसवे पर उल्टे सीधे वाहनों को चलाने वाले को कोई रोकने वाला नहीं है। दिन के वक्त भी जो लेन जिसके लिए निर्धारित है, उसका पालन नहीं किया जाता है। अधिकतम रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो ओवरटेक से पहले लेन निर्धारित है। कार अगर ओवरटेक करनी है, दाहिनी तरफ डिवाइडर से सटी लेन पर ओवरटेक कर आगे निकाल सकते हैं। तीसरी लेन बसों के लिए निर्धारित है और सबसे किनारे वाली लेन पर ट्रैक्टर व धीमी गति से चलने वाले वाहन चलते हैं। लेकिन बस चालक तो ओवरटेक वाली लेन में बसों को दौड़ाते मिल जाएंगे।
यमुना एक्सप्रेस वे पर हादसे में पांच की मौत: मातम में बदलीं दिवाली की खुशियां, आर्यन कर रहा था एयरफोर्स की तैयारी
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आगरा से प्राइवेट बस नोएडा की तरफ जा रही थी। बस को चालक बलविंदर पुत्र हरजीत निवासी मकान-411, वार्ड-25 मोहल्ला डाकी चौक, थाना डिविजन-2 पठानकोट (पंजाब) चला रहा था। थाना नौहझील के एक्सप्रेसवे पर माइल स्टोन-71 के पास बस पहुंची तो बेकाबू होते हुए डिवाइडर को तोड़ते हुए दूसरे साइड में नोएडा से आ रही कार से टकरा गई। कार को करीब 30 मीटर तक घसीटते हुए ले गई।
दिवाली की खुशियां मातम में बदलीं, जा रहे थे कानपुर
दिवाली मनाने के बाद अपने गांव कानपुर जा रहे कार सवारों को क्या पता था कि मौत उन पर झपट्टा मारने के इंतजार में खड़ी है। हालांकि कार चालक की कतई भी गलती नहीं थी। बस चालक की गलती का खामियाजा कार सवार चार लोगों को जिंदगी गंवाने पर भुगतना पड़ा। गोवर्धन पूजा वाले दिन हुए हादसे के कारण चार परिवारों में कोहराम मच गया। दिवाली की खुशियां मातम में तब्दील हो गईं। पोस्टमार्टम गृह पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।