{"_id":"605ef1571324eb4ef21af647","slug":"holi-celebration-in-vrindavan-mathura","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"ब्रज की होली: मंदिरों में उड़ रहा जमकर गुलाल, आराध्य संग भक्त खेल रहे होली, देखिए तस्वीरें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्रज की होली: मंदिरों में उड़ रहा जमकर गुलाल, आराध्य संग भक्त खेल रहे होली, देखिए तस्वीरें
Sat, 27 Mar 2021 02:26 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 27 Mar 2021 02:26 PM IST
विज्ञापन
बांकेबिहारी मंदिर में होली खेलते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली वृंदावन स्थित मंदिरों में होली के रंग जमकर बरस रहे हैं। श्रीबांकेबिहारी, श्रीराधावल्लभ सहित विभिन्न मंदिरों में होली के आयोजन हो रहे हैं। जहां भक्त होली के रंगों से सराबोर होते हुए आनंदित हो रहे हैं। वृंदावन मंदिरों का नगर है। यहां घर-घर मंदिर स्थापित हैं। इन दिनों इन मंदिरों में होली के भव्य आयोजन किए जा रहे हैं। रंग-गुलाल की बरसात हो रही है। खासकर श्रीबांकेबिहारी में रंगभरनी एकादशी से रंगों की होली शुरू हो गई है। दर्शन को आने वाले भक्त यहां ठाकुरजी के रंग में रंगते हुए नजर आते हैं।
वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में होली खेलते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
सेवायत भक्तों पर रंग-गुलाल डाल रहे हैं। यही दौर राधावल्लभ सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में भी देखने को मिल रहा है। इससे वृंदावन में भक्तों की भीड़ है। दर्शन के लिए भी लंबी कतारें लगी हुई हैं। पुलिस और प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। वाहनों का प्रवेश पहले ही रोक दिया गया है।
बांकेबिहारी मंदिर पर गुलाल उड़ाते सेवायत
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को भी वृंदावन की कुंज गलियों में होली की मस्ती का रंग दिखाई दिया। रंग गुलाल में सराबोर भक्त एक से दूसरे मंदिर दर्शन के लिए जाते हुए नजर आए। श्रद्धालुओं की टोलियां वृंदावन में अद्भुत होली का अहसास करा रही थीं। होली गायन की परंपरा भी बाहर से आए भक्तों को आनंदित कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
द्वारिकाधीश मंदिर में रंग उड़ाते सेवायत
- फोटो : अमर उजाला
बगीचे में विराजे राजाधिराज, भक्तों संग खेली होली
पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के द्वारिकाधीश मंदिर में राजाधिराज ने बगीचे में विराजमान होकर भक्तों संग होली खेली। मंदिर में भक्तों की भीड़ रही। भक्तों ने भी ठाकुजी के दर्शन कर कृतार्थ हुए। राजाधिराज को होली खिलाने के लिए पुजारियों ने मंदिर में बगीचा सजाया। बगीचे में हरे, लाल, नीले, पीले रंग के गुलाल और टेसू के रंगों के फूलों का प्रयोग हुआ। दोपहर 1:30 बजे से ठाकुरजी ने गुलाब जल और फूलों के रंगों से भक्तों संग होली खेली। बाग में विराजे ठाकुर जी को श्रद्धालु अपलक निहारते रहे। मंदिर पुजारी श्रद्धालुओं पर रंग डाल रहे थे और भक्त भी अपने आराध्य के प्रसाद को ग्रहण कर अभिभूत हुए।
पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के द्वारिकाधीश मंदिर में राजाधिराज ने बगीचे में विराजमान होकर भक्तों संग होली खेली। मंदिर में भक्तों की भीड़ रही। भक्तों ने भी ठाकुजी के दर्शन कर कृतार्थ हुए। राजाधिराज को होली खिलाने के लिए पुजारियों ने मंदिर में बगीचा सजाया। बगीचे में हरे, लाल, नीले, पीले रंग के गुलाल और टेसू के रंगों के फूलों का प्रयोग हुआ। दोपहर 1:30 बजे से ठाकुरजी ने गुलाब जल और फूलों के रंगों से भक्तों संग होली खेली। बाग में विराजे ठाकुर जी को श्रद्धालु अपलक निहारते रहे। मंदिर पुजारी श्रद्धालुओं पर रंग डाल रहे थे और भक्त भी अपने आराध्य के प्रसाद को ग्रहण कर अभिभूत हुए।
विज्ञापन
द्वारिकाधीश मंदिर में रंगों की बौछार
- फोटो : अमर उजाला
ब्रज फाग द्वारकेश रसिया मंडल के चुन्नीलाल चतुर्वेदी आदि ने ढप की थाप पर आज बिरज में होरी रे रसिया..., आज होरी खेलन चलौ बरसाने को...आदि पद और होली गीत गाकर ठाकुरजी को रिझाया। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि आज ठाकुरजी बगीचा में विराजमान होकर होली खेलते हैं और भावनात्मक रूप से चौवा, चंदन बरसाए जाते हैं। यह क्रम निरंतर जारी रहेगा और 28 मार्च को सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक ढोल महोत्सव के दर्शन होंगे। इसके बाद सभी सेवा मंदिर के अंदर ही अंदर होगी। आम भक्तों के लिए मंदिर के दर्शन नहीं खुलेंगे। 29 मार्च को भक्तों को दर्शनों का लाभ होगा। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए 60 वर्ष से अधिक और 10 वर्ष से कम के बच्चों को मंदिर में प्रवेश नहीं होगा। राजाधिराज के आंगन में बरस रहे होली के आनंद को लूटने के लिए श्रद्धालु भक्त भी पीछे नहीं रहे। मंदिर में गुलाल और रंग से सराबोर हो श्रद्धालु अपने को धन्य मान रहे थे। मंदिर प्रांगण द्वारिकाधीश के जयकारों से गुंजायमान हो रहा था।