मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर गुरुवार को एक निजी विमान की आपात लैंडिंग कराई गई। एक्सप्रेसवे पर लैंडिंग का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले 21 मई साल-2015 में भारतीय सेना के लड़ाकू विमान मिराज-2000 की लैंडिंग कराई गई थी। दो बार एक्सप्रेसवे को छूते हुए इस लड़ाकू विमान ने उड़ान भरी थी। भारतीय वायुसेना समय-समय पर ऐसे स्थलों को परखती है, जिससे यहां से लड़ाकू विमान उड़ान भर सकें। पाकिस्तान से तनातनी के मध्य भारतीय सेना ने एक्सप्रेसवे को परखा था। भारतीय सेना ने लड़ाकू विमान के लिए एक्सप्रेसवे को सफल माना था। उसके बाद आगरा और नोएडा में भी ऐसे लड़ाकू विमान को उतारकर भारतीय सेना ने हकीकत को परखा था। गुरुवार को भी इंजन की पावर सप्लाई में आई दिक्कत के चलते दो सीटर एयरक्राफ्ट के कैप्टन ने एक्सप्रेसवे को आपातकालीन लैंडिंग के लिए उचित माना। सकुशल लैंडिंग होने पर कैप्टन और ट्रेनी पायलट सकुशल बच गए। एक बार फिर यह साबित हो गया कि एक्सप्रेसवे देश की सुरक्षा में काफी मददगार हो सकता है।
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आपात लैंडिंग का मामला: यमुना एक्सप्रेसवे पर दो बार उतर चुका है लड़ाकू विमान मिराज
Fri, 28 May 2021 12:06 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 28 May 2021 12:06 AM IST
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यमुना एक्सप्रेसवे पर लड़ाकू विमान मिराज
- फोटो : अमर उजाला
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यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई विमान की आपात लैंडिंग
- फोटो : अमर उजाला
एयरक्राफ्ट के संग सेल्फी का दिखा क्रेज
एक्सप्रेसवे पर एयरक्राफ्ट की आपातकालीन लैंडिंग होने के बाद आसपास के ग्रामीण उसे देखने के लिए दौड़ पड़े। हर कोई एयरक्राफ्ट को देखकर अचंभित रह गया। कुछ ऐसे युवा और महिलाएं भी थीं, जो कि एयरक्राफ्ट के साथ सेल्फी लेना नहीं भूले। सेल्फी का क्रेज तब तक बना रहा, जब तक कि एयरक्राफ्ट ने उड़ान नहीं भरी। थाना नौहझील पुलिस ग्रामीणों को काफी समझाती रही। कई बार तो पुलिस को ग्रामीणों को भगाना भी पड़ा।
एक्सप्रेसवे पर एयरक्राफ्ट की आपातकालीन लैंडिंग होने के बाद आसपास के ग्रामीण उसे देखने के लिए दौड़ पड़े। हर कोई एयरक्राफ्ट को देखकर अचंभित रह गया। कुछ ऐसे युवा और महिलाएं भी थीं, जो कि एयरक्राफ्ट के साथ सेल्फी लेना नहीं भूले। सेल्फी का क्रेज तब तक बना रहा, जब तक कि एयरक्राफ्ट ने उड़ान नहीं भरी। थाना नौहझील पुलिस ग्रामीणों को काफी समझाती रही। कई बार तो पुलिस को ग्रामीणों को भगाना भी पड़ा।
यमुना एक्सप्रेसवे पर खड़ा विमान
- फोटो : अमर उजाला
उड़ान भरते ही पांच हजार फीट ऊंचाई पर था एयरक्राफ्ट
विमान के पायलट आदित्य घोष ने पुलिस को बताया कि अलीगढ़ की धनीपुर मंडी से पॉयनियर फ्लाइंग अकादमी के एयरक्राफ्ट ने जब उड़ान भरी थी तो वह 5000 फीट की ऊंचाई पर था। उसकी स्पीड करीब 180 किमी. प्रति घंटे की थी। अचानक इंजन की पावर सप्लाई में आई खराबी के कारण 20 मिनट बाद ही एयरक्राफ्ट को एक्सप्रेसवे पर लैंडिंग करानी पड़ी।
विमान के पायलट आदित्य घोष ने पुलिस को बताया कि अलीगढ़ की धनीपुर मंडी से पॉयनियर फ्लाइंग अकादमी के एयरक्राफ्ट ने जब उड़ान भरी थी तो वह 5000 फीट की ऊंचाई पर था। उसकी स्पीड करीब 180 किमी. प्रति घंटे की थी। अचानक इंजन की पावर सप्लाई में आई खराबी के कारण 20 मिनट बाद ही एयरक्राफ्ट को एक्सप्रेसवे पर लैंडिंग करानी पड़ी।
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यमुना एक्सप्रेसवे पर खड़ा विमान
- फोटो : अमर उजाला
विमान की लैंडिंग के लिए पायलट ने सबसे पहले दिल्ली एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम को सूचित किया। वहां से तुरंत ही लोकेशन ट्रेस की गई तो पाया गया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर आसानी से लैंडिंग कराई जा सकती है। अनुभवी पायलट ने मौका पाकर एक्सप्रेसवे पर एयरक्राफ्ट को उतार दिया।
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यमुना एक्सप्रेसवे
- फोटो : अमर उजाला
यमुना एक्सप्रेसवे की खासियत
- ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबा और छह लेन का यमुना एक्सप्रेसवे 2012 में बनकर तैयार हुआ।
- एक्सप्रेसवे बनाने में जर्मनी की तकनीकी का प्रयोग किया गया, यह करीब 12 हजार करोड़ की लागत से बना है।
- इतिहास में पहली बार किसी एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमान को उतारने में सफल रही थी।
- युद्ध के दौरान लड़ाकू विमानों को दुश्मनों से रडार से बचाने के लिए के लिए एक्सप्रेसवे ही सुरक्षित माना गया है।
- आगरा से लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भी लड़ाकू विमानों को उतारने का अभ्यास किया जा चुका है।
- आने वाले समय में देश में जितने भी एक्सप्रेसवे या हाईवे बनेंगे, सभी पर विमान उतारने की सुविधा होगी।
- ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबा और छह लेन का यमुना एक्सप्रेसवे 2012 में बनकर तैयार हुआ।
- एक्सप्रेसवे बनाने में जर्मनी की तकनीकी का प्रयोग किया गया, यह करीब 12 हजार करोड़ की लागत से बना है।
- इतिहास में पहली बार किसी एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमान को उतारने में सफल रही थी।
- युद्ध के दौरान लड़ाकू विमानों को दुश्मनों से रडार से बचाने के लिए के लिए एक्सप्रेसवे ही सुरक्षित माना गया है।
- आगरा से लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भी लड़ाकू विमानों को उतारने का अभ्यास किया जा चुका है।
- आने वाले समय में देश में जितने भी एक्सप्रेसवे या हाईवे बनेंगे, सभी पर विमान उतारने की सुविधा होगी।