आगरा जिले के बाह क्षेत्र में चंबल सेंक्च्युरी में घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन के तेंदुए प्राकृतिक प्रहरी बन गए हैं। चंबल में तेंदुओं की संख्या बढ़ने से घड़ियाल, डॉल्फिन के बच्चों और अंडों के शिकार की घटनाओं में कमी आई है। बाह रेंज में तेंदुओं की संख्या 30 तक हो गई है। वन विभाग के अफसर चंबल में तेंदुओं की आबादी को घड़ियाल संरक्षण के लिए अच्छा मान रहे हैं। उनका कहना है कि तेंदुओं की आबादी बढ़ने से जलीय जीवों के शिकार का खतरा कम हो गया है।
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आगरा: चंबल में घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन के पहरेदार बने तेंदुए, इनके डर से शिकारियों पर लगा अंकुश
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 04 Mar 2022 04:40 PM IST
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चंबल में घड़ियाल, डॉल्फिन और तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला
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चंबल में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
317 घड़ियाल बढ़े, 172 मगरमच्छ
चंबल सेंक्चुरी में घड़ियाल 1859 से बढ़कर 2176, डॉल्फिन 74 से बढ़कर 78 और मगरमच्छ 710 से बढ़कर 882 हो गए हैं। अभी चल रहे सर्वे में संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है।
चंबल सेंक्चुरी में घड़ियाल 1859 से बढ़कर 2176, डॉल्फिन 74 से बढ़कर 78 और मगरमच्छ 710 से बढ़कर 882 हो गए हैं। अभी चल रहे सर्वे में संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है।
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चंबल में तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला
विलायती बबूल से संकट में पड़ गए थे तेंदुए
विलायती बबूल (जूली फ्लोरा) के कांटे गद्दीदार पैरों में चुभने से चंबल के बीहड़ से वन्यजीव तेंदुआ, लकड़बग्घा, सांभर, लोमड़ी, बारहसिंगा की आबादी खतरे में पड़ गई थी। पांच साल पहले दो-चार तेंदुए बीहड़ में दिखते थे। बाद में क्षेत्र में झाड़ियां कम होने और बड़े पत्ते वाले छायादार पेड़ लगाने के कारण वन्यजीवों का कुनबा बढ़ गया है। बबूलों की संख्या कम होने से तेंदुओं की आबादी बढ़ी। अब इनकी संख्या तीस के करीब है।
विलायती बबूल (जूली फ्लोरा) के कांटे गद्दीदार पैरों में चुभने से चंबल के बीहड़ से वन्यजीव तेंदुआ, लकड़बग्घा, सांभर, लोमड़ी, बारहसिंगा की आबादी खतरे में पड़ गई थी। पांच साल पहले दो-चार तेंदुए बीहड़ में दिखते थे। बाद में क्षेत्र में झाड़ियां कम होने और बड़े पत्ते वाले छायादार पेड़ लगाने के कारण वन्यजीवों का कुनबा बढ़ गया है। बबूलों की संख्या कम होने से तेंदुओं की आबादी बढ़ी। अब इनकी संख्या तीस के करीब है।
चंबल में मगरमच्छ
- फोटो : अमर उजाला
चौपाल लगाकर किया जा रहा जागरूक
विश्व वन्यजीव दिवस पर गुरुवार को चंबल किनारे के गांवों में मानव वन्यजीव संघर्ष टालने और संरक्षण में सहयोग के लिए चौपाल लगाकर जागरूक किया गया। वन्य जीव विभाग नेशनल चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल नदी के किनारे तेंदुए के दिखने पर ‘क्या करें, क्या न करें’ के बोर्ड लगवाने के साथ ग्रामीणों को जानकारी भी दे रहे हैं ताकि कोई हानि न हो।
विश्व वन्यजीव दिवस पर गुरुवार को चंबल किनारे के गांवों में मानव वन्यजीव संघर्ष टालने और संरक्षण में सहयोग के लिए चौपाल लगाकर जागरूक किया गया। वन्य जीव विभाग नेशनल चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल नदी के किनारे तेंदुए के दिखने पर ‘क्या करें, क्या न करें’ के बोर्ड लगवाने के साथ ग्रामीणों को जानकारी भी दे रहे हैं ताकि कोई हानि न हो।
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चंबल नदी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में घड़ियालों की प्रजाति संकटग्रस्त जीवों की सूची में है। घड़ियालों की 80 फीसदी आबादी चंबल नदी में मौजूद है। चंबल नदी में वर्ष 1979 से घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है। हर साल इनकी गणना होती है।