फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

चुनाव के रंग और ढंग बदले, नहीं बदली अमिट स्याही, जानें कब से शुरू हुआ इसका इस्तेमाल

Sat, 06 Apr 2019 06:12 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 06 Apr 2019 06:12 PM IST
विज्ञापन
lok sabha elections 2019 ink used on the finger of the voter
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
लगातार प्रगति कर रहे देश के चुनावों में भी हर बार कुछ न कुछ बदलाव देखे गए हैं। जब देश तकनीक की ओर बढ़ रहा है तो चुनाव आयोग भी  हाईटेक हो चला है। देश के पहले चुनाव से लेकर अब तक बहुत कुछ बदल चुका है। मतपेटियों में वोट डालने का चलन खत्म हो गया है तो प्रचार प्रसार का तरीके में भी काफी बदलाव आया है। इन सबके बीच कोई जो अपना दबदबा कायम किए है तो वो है चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली अमिट स्याही।
lok sabha elections 2019 ink used on the finger of the voter
अमिट स्याही
इसका उपयोग जबसे शुरू हुआ तब से यह आज तक कायम है। अब बिना इसके चुनाव संपन्न होने की कल्पना नहीं की जा सकती। फर्जी वोटिंग रोकने का इसे बड़ा हथियार माना जाता है। मतदाता इस स्याही को मिटा नहीं सकता है। देश में 1951-52 में जब पहली बार चुनाव हुए तब मतदान के लिए प्रत्याशियों के नाम की अलग अलग मतपेटियां हुआ करतीं थी। लोग अपने पंसदीदा प्रत्याशी के मतपेटी में अपना मत डाल देते थे। 1957 के चुनावों में भी लगभग यही प्रक्रिया रही। 
 
lok sabha elections 2019 ink used on the finger of the voter
प्रतीकात्मक तस्वीर
चुनाव के दौरान मतदाताओं को लगाई जाने वाली स्याही का पहली बार इस्तेमाल तीसरे आम चुनाव 1962 में किया गया था। इससे पहले हुए चुनावों में स्याही का उपयोग नहीं किया गया था। तीसरे चुनाव में मतदाताओं की पहचान के लिए इसकी शुरूआत की गई थी, जिससे फर्जी वोटिंग न हो सके। इसके बाद से आज तक इस स्याही को लगाने का चलन चलता आ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
lok sabha elections 2019 ink used on the finger of the voter
ईवीएम - फोटो : अमर उजाला
मतपेटिकाओं में मत डालने का फार्मूला चुनाव आयोग ने काफी दिन तक चलाया। 1999 के चुनाव में नया प्रयोग किया गया। मतगणना में अधिक समय खर्च होने के चलते ईवीएम लाई गई। इसमें मत डालने का तरीका काफी आसान था। अपने पसंदीदा प्रत्याशी के नाम के सामने लगी बटन को बस दबाना था और आपका मत डल जाता है। यह प्रक्रिया अब तक चल रही है। इस बदलाव के दौरान भी अमिट स्याही लगाने का सिलसिला जारी रहा।
 
विज्ञापन
lok sabha elections 2019 ink used on the finger of the voter
प्रतीकात्मक तस्वीर
कुछ खास बातें
- अमिट स्याही का इस्तेमाल पहली बार तीसरे आम चुनाव 1962 में किया गया।
- 1999 में ईवीएम आने पर भी इसका उपयोग जारी रहा।
- इस अमिट स्याही को निर्वाचन आयोग ही उपलब्ध कराता है।
- मतदान से पहले इसे मतदान अधिकारियों को सौंपा जाता है।
- हर मतदान दल के पीठासीन अधिकारी को दी जाती एक शीशी।
- लगभग 800 मतदाताओं को लगाई जा सकती है एक शीशी स्याही।
- जोनल अधिकारी के पास रहती है अतिरिक्त स्याही की शीशी।
- मतदान समाप्त होने के बाद शीशी में स्याही बचने पर इसे निर्वाचन कार्यालय में जमा कराना होता है।


आप इन खबरों के बारे में और क्या जानना चाहते हैं। कृपया अपनी कीमती राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed