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महाशिवरात्रि: 101 साल बाद बन रहा शिव-सिद्धि योग, आगरा के चारों कोनों पर विराजमान हैं भगवान भोलेनाथ
Thu, 11 Mar 2021 09:37 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 11 Mar 2021 09:37 AM IST
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महाशिवरात्रि: शहर के चारों कोनों पर हैं भगवान शिव
- फोटो : अमर उजाला
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महाशिवरात्रि पर गुरुवार को 101 साल बाद शिव योग और सिद्धि योग बन रहा है। नक्षत्र घनिष्ठा रहेगा। चंद्रमा मकर राशि में विराजमान रहेगा। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन शिव योग, सिद्धि योग और घनिष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इससे पर्व की महत्ता और अधिक बढ़ गई है। ऐसे में महाशिवरात्रि पर्व की पूजा विधि-विधान के साथ करना विशेष कल्याणकारी होगा। इधर, महाशिवरात्रि पर्व से दो दिन पहले ही ब्रज की काशी बटेश्वर कांवड़ियों के बम भोले जयघोष से गूंज उठा है। सोरों से कांवड़ लेकर भोलेनाथ के अभिषेक के लिए धौलुपर,मुरैना, भिंड क्षेत्र के कांवड़िए निकले। मंदिर के पुजारी जयप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि ब्रह्मलाल जी मंदिर में महाशिवरात्रि पर अभिषेक के लिए तैयारियां की जा रही हैं। ताजनगरी शिव की भक्ति में लीन है। शहर के चारों कोनों पर भगवान शिव के मंदिर के स्थापित हैं। मध्य भाग में श्री मनकामेश्वर और रावली महादेव भक्तों की रक्षा कर रहे हैं। आज के दिन इन शिवालयों में विशेष आराधना की जाती है। जानिए इन शिव मंदिरों का महत्व...
मनकामेश्वर मंदिर
मन:कामेश्वर मंदिर : भोले बाबा ने किया था यहां विश्राम
भगवान श्रीकृष्ण जब नंदबाबा के यहां पहुंचकर बाल लीलाएं कर रहे थे, तो भगवान भोलेनाथ उनकी लीला देखने के लिए पृथ्वी पर आए। उन्होंने जिस स्थान पर विश्राम किया, वहीं पर मन:कामेश्वर मंदिर है। यहां महा शिवरात्रि का पर्व भगवान भोलेनाथ के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण जब नंदबाबा के यहां पहुंचकर बाल लीलाएं कर रहे थे, तो भगवान भोलेनाथ उनकी लीला देखने के लिए पृथ्वी पर आए। उन्होंने जिस स्थान पर विश्राम किया, वहीं पर मन:कामेश्वर मंदिर है। यहां महा शिवरात्रि का पर्व भगवान भोलेनाथ के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
राज राजेश्वर मंदिर आगरा
- फोटो : अमर उजाला
राजेश्वर महादेव मंदिर : 850 वर्ष पहले बनाया गया
राजाखेड़ा के एक साहूकार इस शिविलंग को मध्य प्रदेश से नर्मदा नदी से लाए थे। वह राजाखेड़ा जा रहे थे। रात में राजपुर चुंगी पर रुके, स्वप्न आया कि मंदिर स्थापना यहीं की जाए। उन्होंने विश्वास नहीं किया लेकिन शिवलिंग को तमाम कोशिश कर भी ले जा नहीं पाए। बाद में यहीं पर मंदिर का निर्माण हुआ।
राजाखेड़ा के एक साहूकार इस शिविलंग को मध्य प्रदेश से नर्मदा नदी से लाए थे। वह राजाखेड़ा जा रहे थे। रात में राजपुर चुंगी पर रुके, स्वप्न आया कि मंदिर स्थापना यहीं की जाए। उन्होंने विश्वास नहीं किया लेकिन शिवलिंग को तमाम कोशिश कर भी ले जा नहीं पाए। बाद में यहीं पर मंदिर का निर्माण हुआ।
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पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर : पृथ्वीराज चौहान ने बनावाया
किवदंती है कि पृथ्वीराज चौहान यहां आराम करने के लिए रुके तो उन्हें गड़ा शिवलिंग मिला। खोदाई के बाद भी शिविंग का दूसरा छोर नहीं मिला। उन्होंने मंदिर की स्थापना करा दी। उनके नाम पर नाम पड़ा प्रथ्वीनाथ महादेव मंदिर।
किवदंती है कि पृथ्वीराज चौहान यहां आराम करने के लिए रुके तो उन्हें गड़ा शिवलिंग मिला। खोदाई के बाद भी शिविंग का दूसरा छोर नहीं मिला। उन्होंने मंदिर की स्थापना करा दी। उनके नाम पर नाम पड़ा प्रथ्वीनाथ महादेव मंदिर।
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बल्केश्वर महादेव
- फोटो : अमर उजाला
बल्केश्वर महादेव मंदिर :चंदन और केसर से होता है
यमुना तट पर स्थित इस मंदिर का प्राचीन नाम बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर है। पहले यहां बेलपत्र का जंगल था। 700 साल पहले शिवलिंग प्रकट हुआ। इसके बाद मंदिर की स्थापना की गई। यहां शिवलिंग का श्रृंगार चंदन और केसर से किया जाता है। हर सोमवार को बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।
यमुना तट पर स्थित इस मंदिर का प्राचीन नाम बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर है। पहले यहां बेलपत्र का जंगल था। 700 साल पहले शिवलिंग प्रकट हुआ। इसके बाद मंदिर की स्थापना की गई। यहां शिवलिंग का श्रृंगार चंदन और केसर से किया जाता है। हर सोमवार को बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।