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पाक विजय दिवस आज: पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ा, पूर्वी सेक्टर में लहराया था तिरंगा

Fri, 16 Dec 2022 06:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 16 Dec 2022 06:00 AM IST
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Pak Victory Day Pakistani soldiers were chased tricolor was hoisted in the eastern sector
रुदमुली गांव में बना स्मारक और महावीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान के खिलाफ जंग के मोर्चे पर 1965 में डटे रहने वाले जांबाज सर्वजीत सिंह 1971 में भी बहादुरी से लड़े। उन्होेंने यूनिट के साथ पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ कर पूर्वी सेक्टर में तिरंगा लहराया था। आज भी वह जंग की चर्चा छिड़ते ही जोश से लबरेज हो जाते हैं। उन्हीं की प्रेरणा से बेटा रमेश सेना में है।


चीन के बारे में सर्वजीत सिंह कहते हैं कि चीन धोखेबाज और डरपोक दोनों है। 1962 में वह चीन से भी लड़े थे। तब उन्हें ल्हासा चीन में कैद कर लिया गया था और 10 माह बाद छूटकर घर आए थे। सुनाते हुए वह भावुक हो जाते हैं। बोले, जंग के इस मोर्चे पर वह चचेरे भाई हवलदार रघुवीर सिंह, बहनोई असरकी गढ़ी के वीरेंद्र सिंह, नवाटेडा के आदर्श पाल, फुफेरे भाई जगनपुरा भिंड के जसवंत सिंह के साथ लड़ने पहुंचे थे। जिनमें से रघुवीर सिंह, वीरेंद्र सिंह, जसवंत सिंह शहीद हो गए। उनके कैद से आजाद होकर घर लौटने तक पत्नी शकुंतला देवी विधवा के रूप में जी रही थीं। कैद में मिली यातनाओं से टूटे और न ही झुके। आजाद होने के बाद 1965 और 1971 में पाकिस्तान से लड़े और जीत हासिल की।
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जयवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
सिमराई गांव के जयवीर सिंह ने 2001 में पुंछ राजौरी में दो आतंकियों को ढेर कर पाक घुसपैठ को नाकाम किया था। 2006 में जम्मू कश्मीर में 3 आतंकियों को ढेर करने और हथियारों का जखीरा बरामद करने पर वीरता पदक मिला था। 
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सर्वजीत - फोटो : अमर उजाला
इसी तरह बडागांव (बाह) के 85 वर्षीय महावीर सिंह भदौरिया ने 1965 में पाकिस्तान और 67 में चीन से युद्ध लड़ा। जब 1971 में पाकिस्तान से फिर युद्ध हुआ तो वह बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कराने वाली सेना का हिस्सा बने। वह बताते हैं कि दाहिने बांह और पैर में गोली लगने के बाद भी मोर्चे पर डटे रहे। पाक सेना के समर्पण के बाद उन्हें साथियों ने अस्पताल में भर्ती कराया। 
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बाह में दौड़ लगाते युवा - फोटो : अमर उजाला
बेटा विक्रम और पौत्र दीपक वायुसेना में देश की सेवा कर रहे हैं। 1971 के इस युद्ध में बाह तहसील के 350 जवानों ने शौर्य दिखाया था। इनमें से 88 अकेले रुदमुली गांव के थे।    
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राधेश्याम भदौरिया - फोटो : अमर उजाला

देशभक्ति की पौध सींच रहे राधेश्याम

खिच्चरपुरा (बाह) के 82 साल के राधेश्याम भदौरिया अब गांव में देशभक्ति की पौध सींच रहे हैं। बताते हैं कि वे पंजाब बार्डर पर वेरीबाला, असफवाला के मोर्चे पर थे। 13 दिन तक चले युद्ध में दुश्मन के 10 बंकर ध्वस्त किए। चार बेटे सतेंद्र सिंह, सुखवीर सिंह सेना से रिटायर हो चुके हैं। तीसरे नंबर के सूबेदार इंद्रेश सिंह पुंछ रजौरी में, चौथे नंबर के कुलदीप डोडा में तैनात हैं। 
 
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