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Mathura: वृंदावन की गेज लाइन का रोचक इतिहास, ब्रिटिश शासकों से ली थी स्वीकृति, मंदिर में बना था अस्थायी स्टेशन

Fri, 23 Sep 2022 03:31 PM IST
धीरेन्द्र सिंह राजीव अग्रवाल, मथुरा
राजीव अग्रवाल, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 23 Sep 2022 03:31 PM IST
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The history of Vrindavan's gauge line and first rail service is very interesting
रेल बस - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन-मथुरा के बीच रेल सेवा शुरू होने के पीछे ऐतिहासिक तथ्य जुड़ा हुआ है। जब-जब इस रेल का जिक्र आएगा वृंदावन के राधा माधव (जयपुर मंदिर) का नाम लिया जाएगा। इसी मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर ढोने के लिए रेल लाइन बिछाई गई थी।

 

मंदिर के लिए होनी थी लाल पत्थरों की ढुलाई

इतिहासकार लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया कि जयपुर घराने के राजा सवाई माधव सिंह (द्वितीय) द्वारा वृंदावन में जयपुर मंदिर (राधा माधव) का निर्माण कराया गया था। इसके लिए 1905 से 1908 के बीच जयपुर और धौलपुर से लाल पत्थरों की ढुलाई होनी थी। इसके लिए राजा सवाई माधव सिंह द्वारा तत्कालीन ब्रिटिश शासकों से विशेष स्वीकृति लेकर मीटर गेज लाइन बिछाई गई। मंदिर परिसर में ही अस्थायी रूप से स्टेशन बनाया गया था। राधा माधव मंदिर के पुजारी रहे रूप नारायण शर्मा का कहना है कि रेल से पत्थरों की ढुलाई के कारण मंदिर का निर्माण 23 मई 1917 में पूरा हुआ और ठाकुरजी का पाटोत्सव मनाया गया। उन्होंने बताया कि इस मंदिर के निर्माण में 40 वर्ष का समय लगा।
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रेल बस - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन और मथुरा के बीच चलने वाली रेल बस भले ही 1998-99 में शुरू हुई हो इससे पूर्व आठ डिब्बों वाली राधारानी पैसेंजर रेल चला करती थी। इस रेल से सफर करने वाले यात्री मुकुट वल्लभ दुबे एडवोकेट ने बताया कि कोयले से चलने वाले स्टीम इंजन वाली रेलगाड़ी में साधु, संतों के साथ-साथ सैकड़ों दैनिक यात्री और छात्र यात्रा करते थे।
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मंदिर - फोटो : अमर उजाला
रेल गाड़ी का किराया बहुत कम था वहीं साधु-संतों से किराया भी नहीं लिया जाता था। राधारानी पेंसेंजर को बंद करने के पीछे घाटा होना बताया गया। 
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जयपुर मंदिर पर लगा शिलालेख - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद डीजल चलित रेल बस चली और बृहस्पतिवार को आधुनिक सुविधाओं से लैस रेल बस दौड़नी शुरू हो गई।
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सांसद हेमा मालिनी ने रेल बस का किया शुभारंभ - फोटो : अमर उजाला
सांसद हेमा मालिनी ने जिस नई रेल बस सारथी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है उसमें कई खासियतें हैं। इस रेल बस में एक साथ 79 यात्री यात्रा कर सकेंगे। अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस रेल बस प्रतिदिन मथुरा-वृंदावन के बीच दो चक्कर लगाएगी। रेलवे जीएम ने बताया कि रेल बस में एक साथ 44 यात्री बैठ सकते हैं तथा 35 यात्री खड़े हो सकते हैं। 
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