भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को मौन रहते हुए संतों के बीच कुछ घंटे रहकर संत ध्रुवीकरण का संकेत दे गए। अब कुंभ के शाही स्नान के बाद अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों और अन्य अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वरों ने शाह और योगी के साथ जिस तरह संगम में डुबकी लगाई, उसके सियासी हलकों में भले ही मायने खोजे जा रहे हैं लेकिन संगम में संतों संग नेताओं का डुबकी लगाना धर्म और सत्ता के गठजोड़ से इतर नहीं रहा। हर स्थान पर संत देवतुल्य, अतिथि देवो भव: का सूत्र वाक्य फलित दिखा।
अमित शाह के इस अल्प भ्रमण में दिव्य कुंभ, भव्य कुंभ की फलित परिणिति की जय-जय के साथ माना जा रहा है सारी कवायत का केंद्र बिंदु राम मंदिर निर्माण ही रहा। जिसमें 21 फरवरी को शंकराचार्य स्वरूपानंद महाराज के अयोध्या कूच में संतों के जुड़ाव को कम करना है।
संगम घाट पर अमित शाह के साथ सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव मौर्या, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय, विधायक आदि तो थे ही, वहीं जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि, बाबा रामदेव, अखाड़ा परिषद नरेंद्र गिरि, महामंत्री हरीगिरी, परमार्थ निकेतन के चिदानंद मुनि, डॉ. रामकमल वेदांती, देवकी नंदन ठाकुर आदि मौजूदगी चौंकने वाली रही। सभी का संगम स्नान के पहले और बाद में हर-हर गंगे और हर-हर महादेव का जयघोष लगाना धर्म का सत्ता से जुड़ाव स्थापित करा गया।
प्रयागराज में कुंभ भ्रमण के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या, केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का एक साथ प्रभु प्रेमी संघ शिविर में बैठकर मंत्रणा करना लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि मानी जा रही है।
यहीं धर्म के साथ सत्ता में धमक रखने वाले स्वामी अवधेशानंद गिरि, बाबा रामदेव, स्वामी चिदानंद मुनि, देवकी नंदन ठाकुर के साथ हुई भाजपा अध्यक्ष की बैठक में न केवल कुंभ आयोजन पर बम-बम की गई बल्कि भविष्य की कार्ययोजना का प्रस्तावित स्वरूप का खाका तैयार किया गया।