देश भर में अपनी मेधा का लोहा मनवाने वाले नगीनों की दमक से रविवार को कर्नलगंज इंटर कॉलेज की दीवारें निखर उठीं। मौका था कॉलेज की हाईस्कूल की मान्यता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित पुरा छात्र सम्मेलन का। इस खास मौके को यादगार बनाने के लिए देश -विदेश में खुशबू बिखरने वाली कई नामचीन हस्तियां मंच साझा करने के लिए पहुंचीं। इस दौरान अपने पुराने दोस्तों से मिलने के बाद सभी के चेहरे खिल उठे। फिर क्या था, भूली बिसरी यादों को संजोने का जो सिलसिला शुरू हुआ तो समय का पता ही नहीं चला। इस सम्मेलन में 125 से अधिक पुरा छात्र शामिल हुए।
प्रयागराज : कर्नलगंज इंटर कॉलेज के पुरा छात्र सम्मेलन में जुटे पूर्व न्यायमूर्ति, एडीजी, उप थल सेनाध्यक्ष
देश भर में अपनी मेधा का लोहा मनवाने वाले नगीनों की दमक से रविवार को कर्नलगंज इंटर कॉलेज की दीवारें निखर उठीं। मौका था कॉलेज की हाईस्कूल की मान्यता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित पुरा छात्र सम्मेलन का।
इनके बाद विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अमरनाथ केसरवानी ने भी पुराने दिनों के संस्मरण सुनाए। इस मौके पर कॉलेज के प्रबंधक प्रो. महेश चंद्र चट्टोपाध्याय, रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर अरुण कुमार श्रीवास्तव, उप थल सेनाध्यक्ष रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल शांतनु चौधरी, गुजरात के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक इंटेलिजेंस अनुपम सिंह गहलोत, आई सर्जन सुनील कुमार निगम, कमला नेहरू के कैंसर सर्जन डॉ. सपन कुमार श्रीवास्तव, अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी अर्जुन अवार्डी अभिन्न श्याम गुप्ता, विद्यालय प्रबंधन समिति के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. प्रबाल नियोगी, संचालक डॉ. लालजी यादव उपस्थित रहे।
80 वर्ष से अधिक उम्र के पुरा छात्रों का सम्मान
80 वर्ष से अधिक उम्र के पुरा छात्र प्रोफेसर के भूटानी, श्याम बाबू गुप्ता, थल सेना अध्यक्ष जनरल शांतनु चौधरी, न्यायमूर्ति विद्या भूषण उपाध्याय को अंगवस्त व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
रुरा छात्रों ने दिया आर्थिक सहयोग
कर्नलगंज इंटर कालेज को अपना सहयोग प्रदान करते हुए पुरा छात्र डॉ. सपन श्रीवास्तव ने 25 हजार, अनुपम सिंह गहलोत ने 51 हजार, प्रबंधक प्रोफेसर महेश चंद्र चटोपाध्याय ने 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। वहीं, कई पुरा छात्रों ने ऑनलाइन धनराशि विद्यालय को सहयोग के रूप में प्रदान की। इसके अलावा विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य आरपी रस्तोगी के बड़े पुत्र गोपाल रस्तोगी ने भी सहयोग प्रदान करने को कहा।
1889 में हुई थी स्थापना
कर्नलगंज इंटर कालेज की स्थापना 1889 में हुई थी। जिसके बाद 1932 में कक्षा आठ तक की अनुमति प्राप्त हुई। 1948 में हाईस्कूल की मान्यता व 1951 में इंटरमीडिएट की मान्यता प्रदान की गई। वर्तमान में 800 छात्र विद्यालय में पठन-पाठन कर रहे हैं। इसके अलावा विद्यालय के परीक्षा कक्ष का नाम पूर्व प्रधानाचार्य आरपी रस्तोगी के नाम पर है। कर्नलगंज इंटर कालेज के प्रधानाचार्य अजय कुमार ने बताया कि यह विद्यालय का पहला पुरा छात्र सम्मेलन है।
प्रोफेसर विजय शंकर मेमोरियल पुरस्कार
प्रोफेसर विजय शंकर मोमोरियल पुरस्कार डॉ. लाल जी यादव द्वारा अपने गुरु प्रोफेसर विजय शंकर त्रिपाठी की स्मृति में 21 हजार की फिक्स डिपाजिट के ब्याज से शुरू किया गया। यह राशि उन्हें राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी भारत द्वारा बेस्ट साइंस टीचर पुरस्कार के रूप में प्राप्त हुई।
22 मेधावी किए गए पुरस्कृत
विद्यालय के 22 मेधावी छात्रों को कार्यक्रम के दौरान सम्मानित किया गया। जिसमें प्रोफेसर विजय शंकर त्रिपाठी स्मृति से 12 वीं के कृष्ण कुमार शर्मा, राम भगत, वासुदेव बनर्जी एवं श्यामोली बनर्जी स्मृति पुरस्कार हिमांशु पटेल, नितिन कुमार, हेमंत कुमार शुक्ल, मोहम्मद शब्नु, अमन पटेल, मनोज वर्मा, न्यायमूर्ति नंद लाल गांगुली स्मृति पुरस्कार से गणेश तिवारी, अभय सिंह, हरीश कुमार वर्मा, गणेश तिवारी, हर्ष मिश्रा, दीपू व अभिषेक योगेश्वर को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी अभिनय श्याम गुप्ता ने कालेज परिसर में बैडमिंटन कोर्ट तथा बास्केटबॉल कोर्ट का उद्घाटन किया। वहीं विद्यालय में स्थापित विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति छात्रों को वितरित की गई।
विद्यालय की पढ़ाई, अनुशासन ने आज हमें बनाया है। विद्यालय का विकास होना जरूरी है, जिसके लिए सभी पुरा छात्रों को आगे आकर विद्यालय के विकास के अपना सहयोग प्रदान करना होगा। - डॉ. सपन श्रीवास्तव, कैंसर सर्जन
प्रधानाचार्य आरपी रस्तोगी की छह उंगलियां होती थी एक में चाभी और दूसरे में रूल रहता था। जिसको पकड़ते थे, कहते थे भागेगा, भाग, उनका यह डर असेंबली में भी बना रहता था। - आलोक विक्रम सिंह, लीगल हेड, बैंक ऑफ बड़ोदरा
हम लोगों ने जब अनुशासन को तोड़ा तो प्रधानाचार्य आरपी रस्तोगी ने तुरंत याद दिलाया कि अनुशासन क्या होता है। आज उन्हीं का अनुशासन सामने हैं कि यहां से निकले छात्र प्रशासनिक सेवा से लेकर हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। - अनुपस सिंह गहलोत, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, गुजरात इंटेलिजेंस
आज पुरा छात्र में शामिल होकर मुझे काफी अच्छा लग रहा है। अपने पुराने दास्तों से मिलने के बाद यादें ताजा हो गई। कालेज के लिए कंम्यूटर की लैब स्थापित करूंगा, जिसमें शिक्षक की व्यवस्था करूंगा और एक सप्ताह में स्वयं क्लास लूंगा। - प्रोफेसर केके भूटानी, कंम्यूटर साइंस के पूर्व विभागाध्यक्ष
मेरी पूरी शिक्षा इस कालेज को समर्पित है। मैं 20 देशों का भ्रमण कर चुका हूं। मगर यहां से अच्छा कहीं नहीं लगा। यहां का अनुशासन, शिक्षा हमेशा याद रहेगी। - जनरल शांतनु चौधरी, वाइस चीफ ऑफ अर्मी स्टॉफ
1963 हाईस्कूल फस्ट डिवीजन पास होने के बाद कर्नलगंज इंटर कालेज से मेरे पिता जी के नाम पत्र आया था। जिसमें नि:शुल्क विद्यालय में मुझे प्रवेश के लिए कहा गया था। यहां पर हमेशा अच्छी छात्रों को प्रोत्साहित किया गया है और यहां का अनुशासन सबसे बेहतर है। - प्रोफेसर अरूण कुमार श्रीवास्तव, पूर्व विभागाध्यक्ष रसायन विज्ञान