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वसंत पंचमी: घर बैठे तस्वीरों में देखिए नागा साधुओं का शाही स्नान...

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: shubham Updated Sun, 10 Feb 2019 11:35 AM IST
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Naga Sadhu photo in shahi snan at Prayagraj Kumbh Mela 2019
Naga Sadhu
प्रयाराज के कुंभनगर में आज वसंत पंचमी के दिन अन्तिम शाही स्नान किया जा रहा है। ऐसे में श्रद्धालु देश-विदेश से यहां संगम स्नान के लिए आ रहे हैं। कुंभ में नागा साधुओं ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचे है।  अखाड़े सिर्फ कुंभपर्वों में ही स्नान को आते हैं। ऐसे में आस्था, परंपरा और संस्कार के संगम के साथ त्रिवेणी, कुंभ पर्व पर अखाड़ों के शाही स्नान का साक्षी बने। देवता संग नागा संन्यासी शैव अखाड़ों के शाही जुलूस का नेतृत्व किया। अगले स्लाइड्स में देखें, तीसरे शाही स्नान पर नागा साधुओं की बेहतरीन तस्वीरें...
Naga Sadhu photo in shahi snan at Prayagraj Kumbh Mela 2019
Naga Sadhu
महामंडलेश्वरों के साथ ही नए बने नागा संन्यासियों में डुबकी लगाने को लेकर सबसे ज्यादा आतुरता रही। अभूतपूर्व उत्सव के तहत पर्व पर डुबकी से अखाड़ों की छावनी में अद्भुत उत्साह रहा। पूरी रात तैयारियों में ही बीती। 
Naga Sadhu photo in shahi snan at Prayagraj Kumbh Mela 2019
Naga Sadhu
नागा संन्यासियों ने धूना के सामने बैठकर पूरी रात ओम नम:शिवाय का मंत्र जप करते हुए पवित्र भभूत तैयार की।  सभी नए नागा संन्यासी संन्यास दीक्षा के बाद पहली बार शाही स्नान में अखाड़ों की शान बनकर संगम में डुबकी लगाए।
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Naga Sadhu photo in shahi snan at Prayagraj Kumbh Mela 2019
Naga Sadhu
सबसे पहले देवता और भाला निशान, फिर नागा और तब महामंडलेश्वरों, संतों और संग आए श्रद्धालुओं की ओर से डुबकी लगाई। पेशवाई की तरह ही शाही स्नान जुलूस में भी देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए बैंडबाजा वालों के साथ नागा साधुओं ने डुबकी लगाई। परंपरा के मुताबिक सबसे पहले महानिर्वाणी और उनके संग अटल अखाड़े के संत, नागा संन्यासी डुबकी लगाए। आमतौर पर नागा साधुओं का संंबंध शैव समुदाय से होता है। इनके इष्टदेव आमतौर पर भगवान शिव होते हैं। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी है।
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Naga Sadhu photo in shahi snan at Prayagraj Kumbh Mela 2019
Naga Sadhu
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार धर्म के सिपाही होने के चलते इन्हें श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। नागा साधु बनने के लिए 6 साल का लंबा समय लगता है। 
इस दौरान उन्हें कड़ी साधना करनी पड़ती है। नए सदस्य नागा साधुओं को शुरुआत में एक लंगोट के अलावा कुछ पहनना नहीं होता है। कुंभ मेले में दीक्षा लेने के बाद उन्हें लंगोट भी त्याग देना होता है।
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