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प्राचीन शिवालय में मिले सीढ़ीदार रास्ते, खंडित मूर्ति के रहस्य को जानने में जुटे इतिहासकार, तस्वीरें

Tue, 22 Oct 2019 02:11 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Tue, 22 Oct 2019 02:11 AM IST
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Historians are working to unravel mystery of history after fragmented statue recovered at Baghpat
सिनौली उत्खनन - फोटो : अमर उजाला

बागपत में महाभारतकालीन सादिकपुर सिनौली में स्थित प्राचीन शिवालय से प्राप्त खंडित मृणमूर्ति का रहस्य कुषाणकालीन से जुड़ा हो सकता है। इतिहासकारों के अनुसार खुदाई से यहां पर मानव बस्ती के प्रमाण प्राप्त हो सकते हैं। इतिहासकारों का दल जल्द ही सिनौली का दौरा करेगा।

Historians are working to unravel mystery of history after fragmented statue recovered at Baghpat
खुदाई के दौरान मिला सीढ़ीदार रास्ता और खंडित मृणमूर्ति। - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला में शिवालय से सीढ़ीदार रास्ते और खंडित मृणमूर्ति मिलने के बारे में समाचार प्रकाशित होने के बाद सोमवार को ग्रामीण शिव मंदिर के नीचे निकली सीढ़ियों और तहखाने की दीवारों को देखते रहे। इस संबंध में जनपद में ऐतिहासिक स्थल सर्वेक्षण समिति के सचिव डॉ. अमित राय जैन का कहना है कि यहां से प्राप्त अवशेषों के चित्रों को देखकर लगता है कि यहां इस प्राचीन मंदिर के नीचे कोई तहखाना या कोई कक्ष या फ्लोर आदि हो सकते हैं। जिस समय सर्वेक्षण किया जाएगा वस्तुस्थिति तब ही सामने आएगी। प्राचीन सभ्यता से जुड़े प्राचीन बस्ती के प्रमाण मिल सकते हैं। यह मूर्ति कुषाण कालीन प्रतीत होती है। इस तरह के चेहरे बनावट और भाव भंगिमा की मूर्तियां ज्यादातर कुषाण कालीन कलाकारों के द्वारा ही बनाई जाती थीं। मूर्ति की रासायनिक प्रक्रियाओं से साफ सफाई की जाएगी तब और अधिक स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।

Historians are working to unravel mystery of history after fragmented statue recovered at Baghpat
देखने वालों की भीड़ लगी - फोटो : अमर उजाला

शीघ्र ही वह अपने इतिहासकारों के प्रतिनिधिमंडल के साथ सनौली गांव के प्राचीन शिव मंदिर का दौरा कर ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट बनाकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भेजेंगे। डीएम शकुंतला गौतम से भी मांग की जाएगी कि मिल रहे प्रमाणों के आधार पर उपरोक्त स्थल का संरक्षण करने के आदेश जारी किए जाए।

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Historians are working to unravel mystery of history after fragmented statue recovered at Baghpat
सिनौली उत्खनन - फोटो : अमर उजाला

मंदिर के पास बने मकान में रहने वाले ब्रजपाल, अंकुश, रोहन, रवि मान और आसू इसकी जानकारी एएसआई आगरा और दिल्ली को दे चुके हैं। साथ ही एएसआई की साइट पर प्राप्त हुए सीढ़ीदार रास्ते, खंडित मृण मूर्ति के फोटो अपलोड कर चुके हैं। समाजसेवी विपिन पूनिया ने बताया कि एएसआई के अधिकारी ने ग्रामीणों को गांव में जल्द ही आने की बात कही है।

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Historians are working to unravel mystery of history after fragmented statue recovered at Baghpat
सिनौली उत्खनन - फोटो : अमर उजाला

ओर खुदाई हुई तो मिल सकते है महत्वपूर्ण पुरावेशष
गांव में स्थित हनुमान मंदिर में करीबन वर्षों से रह रहे गुजरात निवासी पुजारी दयालदास का कहना है कि उनके गुरू रघुनाथ दास महाराज ने बताया था कि पहले यहां पर मंदिर नहीं था। यहां पर शिव की एक पिंडी दिखाई दी थी, जब लोगों ने उसे निकालने का प्रयास किया तो पिंडी निकालते समय दूध निकलना शुरू हो गया था। ग्रामीणों ने इससे छोड़कर दूसरे जगह खोदाई की तो उसी के पास नंदी, गणेश की प्राचीन मूर्तियां भी मिली थीं। तभी ग्रामीणों ने यहां पर मंदिर का निर्माण किया था। बताया कि यहां पर पहले यमुना बहती थी और प्राचीन युग में यहां के अवशेष जमीन में दफन हो गए होंगे। यदि यहां पर खोदाई कराई जाए तो ओर भी प्राचीन और महत्वपूर्ण पुरावशेष मिल सकते हैं।

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